उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की शाहबाद तहसील इस समय एक बड़े प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गई है. एक सरकारी दफ्तर, एक महिला लेखपाल, एक युवा पीसीएस अधिकारी, एक अधिवक्ता पिता, सोशल मीडिया पर वायरल होता वीडियो और वकीलों का प्रदर्शन...इन सबने मिलकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. इस मामले में एक तरफ जहां महिला लेखपाल ने एसडीएम पर छेड़छाड़, अभद्रता और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ एसडीएम सुशील मिश्रा इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा बता रहे हैं. फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच पुलिस के हाथों में है.
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तबादले और काम के बंटवारे से शुरू हुई कहानी
इस पूरे विवाद की जड़ एक प्रशासनिक तबादले से जुड़ी हुई है. महिला लेखपाल का हाल ही में बिलग्राम से शाहबाद तहसील में तबादला हुआ था, जहां उन्होंने 25 जून को अपनी जॉइनिंग दी. जॉइनिंग के बाद उन्हें कार्यालय में खतौनी संबंधी कार्य सौंपा गया. महिला लेखपाल का कहना है कि उनकी आंखों में समस्या है, जिसके कारण वह कंप्यूटर पर बैठकर दफ्तर का काम नहीं कर सकतीं और उन्होंने फील्ड ड्यूटी की मांग की थी. यहीं से एसडीएम और महिला लेखपाल के बीच विचारों और बयानों का मतभेद शुरू हुआ, जिसने बाद में एक बड़े विवाद का रूप ले लिया.
महिला लेखपाल के एसडीएम पर बेहद गंभीर आरोप
महिला लेखपाल का आरोप है कि उन्हें एसडीएम सुशील मिश्रा ने शाम के समय अपने चेंबर में बुलाया. चेंबर में जाते ही एसडीएम ने सबसे पहले उनकी जाति पूछी और जब उन्होंने अपनी जाति बताई, तो एसडीएम कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अभद्र भाषा पर उतर आए. लेखपाल का दावा है कि एसडीएम ने उनके साथ अश्लील बातें कीं और उन पर व्यक्तिगत रूप से केवल चेंबर में ही काम करने का दबाव बनाया. जब महिला लेखपाल ने इसका विरोध किया और अपनी आंखों की समस्या का हवाला दिया, तो एसडीएम ने कथित रूप से धमकी दी कि वे उन्हें सस्पेंड कर देंगे, मुकदमा दर्ज करवाएंगे और वापस उसी जगह भिजवा देंगे जहां से उनका ट्रांसफर हुआ है.
एसडीएम सुशील मिश्रा का पलटवार और सफाई
दूसरी तरफ, शाहबाद के एसडीएम सुशील मिश्रा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. एसडीएम का कहना है कि यह पूरा विवाद केवल सरकारी काम को न करने की वजह से खड़ा हुआ है. उनके मुताबिक, संबंधित क्षेत्र की खतौनी फीडिंग का काम नहीं हो पा रहा था, जिसके सिलसिले में उन्होंने महिला लेखपाल को बुलाकर पूछताछ की थी. जब लेखपाल ने आंखों की समस्या बताई, तो एसडीएम ने उनसे डॉक्टर का पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) दिखाने और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से जांच कराने की बात कही, ताकि नियमतः उन्हें फील्ड ड्यूटी दी जा सके. एसडीएम का दावा है कि बातचीत के दौरान उनके चेंबर में सप्लाई इंस्पेक्टर और पेशकार समेत कई अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, जो इस बात के गवाह हैं कि वहां कोई अभद्रता नहीं हुई.
चेंबर में वकीलों का हंगामा और पिता का दर्द
एसडीएम से बातचीत के बाद महिला लेखपाल ने रोते हुए अपने पिता को फोन किया, जो कि शाहबाद तहसील में ही पिछले 28 वर्षों से अधिवक्ता हैं. बेटी का फोन आते ही पिता अन्य साथी वकीलों के साथ सीधे एसडीएम के चेंबर में घुस गए. इसके बाद चेंबर के भीतर दोनों पक्षों में तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई. लेखपाल के पिता ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने उनके साथ भी बदतमीजी की, उन्हें धक्का दिया और जातिसूचक गालियां दीं. पिता ने रोते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' के नारे पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी बेटी इस प्रताड़ना से इतनी आहत थी कि वह आत्महत्या करने की बात कह रही थी. इस हंगामे के बाद वकीलों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर एसडीएम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
एसडीएम का पुराना विवाद भी आया सामने
विवादों के घेरे में आए एसडीएम सुशील मिश्रा 2023 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और करीब ढाई महीने पहले ही उनकी शाहबाद में तैनाती हुई है. यह पहली बार नहीं है जब वह किसी विवाद में फंसे हैं. इससे पहले इसी साल 8 जून को परिल गांव में निरीक्षण के दौरान भी उनका ग्रामीणों के साथ बड़ा विवाद हुआ था. उस घटना के दौरान विवाद इतना बढ़ गया था कि ग्रामीणों ने उन पर पथराव कर दिया था, जिसमें वे घायल भी हुए थे. हालांकि, उस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण कोई मुकदमा दर्ज नहीं हो सका था और अब एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा विवाद सामने आ गया है.
पुलिस जांच और सच का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने मामले को और गरमा दिया है. फिलहाल स्थानीय पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि चेंबर में मौजूद कर्मचारियों के बयान, वायरल वीडियो के तकनीकी साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब देखना यह होगा कि पुलिसिया जांच में शाहबाद तहसील के उस बंद चेंबर का असली सच क्या निकलकर सामने आता है.
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