पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हरीश राणा के दुनिया से विदा होने के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उनके परिवार की मदद के लिए आगे आई है. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद इच्छा मृत्यु पाने वाले हरीश राणा का अंतिम संस्कार 25 मार्च को दिल्ली के ग्रीन पार्क में किया गया. आज जब परिवार अस्थियां चुनने पहुंचा, तो माहौल बेहद गमगीन था.
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पिता ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल से धन्यवाद किया है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला अधिकारी और जीडीए वीसी ने उनके घर पहुंचकर सांत्वना दी और आर्थिक सहायता का भरोसा दिलाया. सरकार की ओर से परिवार को करीब 1 लाख रुपये की तत्काल मदद और अन्य घोषणाएं की गई हैं.
13 साल का लंबा संघर्ष और बेबसी
बता दें कि हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के होनहार छात्र थे. 20 अगस्त 2013 को अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद से वे कोमा जैसी स्थिति में थे. 13 साल तक चले लंबे इलाज और कानूनी लड़ाई के बाद, 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर उन्हें पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) की इजाजत दी थी.
अंतिम विदाई और अस्थि संचय
24 मार्च 2026 को दिल्ली एम्स में हरीश ने आखिरी सांस ली. 25 मार्च को अंतिम संस्कार के बाद, आज 26 मार्च की सुबह परिवार ने अस्थियां संचित कीं. यहां से परिवार अस्थि विसर्जन के लिए सीधा हरिद्वार रवाना हो गया. पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पारदीवाला और न्यायमूर्ति विश्वनाथन का भी आभार व्यक्त किया, जिनके मानवीय निर्देश से उनके बेटे को सालों के दर्द से मुक्ति मिली.
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