हाथरस के प्यारेलाल ने पेश की मिसाल, दिव्यांग बेटी को पीठ पर लादकर दिला रहे हैं UP Board की परीक्षा, वीडियो आया सामने

Hathras father viral video: हाथरस में एक पिता प्यारेलाल अपनी दिव्यांग बेटी मान्या को पीठ पर लादकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं परीक्षा दिलाने पहुंच रहे हैं. संघर्ष, हौसले और पिता-पुत्री के जज्बे की यह कहानी सोशल मीडिया पर भावुक कर रही है. आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरी कहानी को.

Hathras father viral video
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राजेश सिंघल

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कहते हैं कि एक पिता के कंधे अपने बच्चों के सपनों के लिए कभी कमजोर नहीं होते. उत्तर प्रदेश के हाथरस से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी मिसाल पेश की है. यहां एक पिता अपनी दिव्यांग बेटी को अपनी पीठ पर बिठाकर हाई स्कूल की परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंच रहे हैं.

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जब बेटी ने कहा- 'पापा, पैर नहीं हैं पर हौसला है'

हाथरस के मोहल्ला औरंगाबाद पूर्वी के रहने वाले प्यारेलाल पेशे से एक मजदूर हैं. उनकी बेटी मान्या जब नौवीं कक्षा में थी, तब एक दर्दनाक हादसे में उसके पैर मशीन में आ गए थे. इस हादसे ने मान्या से उसके पैर तो छीन लिए, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका जज्बा कम नहीं हुआ. मान्या ने अपने पिता से कहा, 'पापा, भले ही मेरे पैर नहीं हैं, लेकिन मेरा हौसला नहीं टूटा है. मैं आपके सहारे पढ़कर अपनी मंजिल तक पहुंचूंगी.' बेटी की इन बातों ने पिता को इतनी हिम्मत दी कि उन्होंने ठान लिया कि वे मान्या की पढ़ाई में कभी कोई बाधा नहीं आने देंगे.

पीठ पर सपनों का सफर

18 फरवरी से यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं. सिकंदराराव तहसील के आर्य कन्या इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर जब प्यारेलाल अपनी बेटी मान्या को पीठ पर लादकर पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया. प्यारेलाल बताते हैं कि हादसे के बाद से ही वे बेटी को इसी तरह पीठ पर बिठाकर स्कूल लाते और ले जाते हैं. उनके पास एक पुरानी विक्की (स्कूटर) है, जिस पर बिठाकर वे उसे लाते हैं और फिर परीक्षा हॉल तक उसे अपनी पीठ पर उठाकर ले जाते हैं.

मजदूरी कर संवार रहे हैं बेटी का भविष्य

प्यारेलाल दिन भर कड़ी मेहनत-मजदूरी करते हैं ताकि घर का खर्चा चल सके और बेटी की पढ़ाई जारी रहे. उनका बस एक ही सपना है कि मान्या पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बन जाए ताकि उसकी जिंदगी सुधर सके. प्यारेलाल कहते हैं, 'मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि मेरी बेटी पढ़ रही है. अगर वह पढ़-लिखकर कहीं सेटल हो गई, तो मेरा जीवन सफल हो जाएगा.'

समाज के लिए बड़ी सीख

एक तरफ जहां समाज में आज भी कुछ लोग बेटियों को बोझ समझते हैं, वहीं प्यारेलाल जैसे पिता यह साबित कर रहे हैं कि अगर पिता का साथ हो, तो बेटी आसमान की ऊंचाइयों को छू सकती है. मान्या की हिम्मत और प्यारेलाल का संघर्ष आज हाथरस ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन गया है.

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