IAS Durga Shakti Nagpal News: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव का एक बड़ा मामला सामने आया है. देवीपाटन मंडल की कमिश्नर आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल और गोंडा की सिविल जज सीनियर डिवीजन शबीना खान के बीच तीन दशक पुराने जमीन के मुकदमे को लेकर मतभेद पैदा हो गया है. यह मामला गोंडा से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ तक पहुंच चुका है.
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जानिए क्या है 30 साल पुराना पूरा मामला?
गोंडा में कीमती सरकारी नजूल की जमीन को लेकर यह पूरा विवाद चल रहा है. साल 1997 से 'ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगर पालिका परिषद' का केस अदालत में लंबित है. सरकार का पक्ष है कि विवादित जमीन का पट्टा 1985 में निरस्त करके इसे सरकारी खाते में दर्ज कर दिया गया था. आरोप है कि इस जमीन पर 1997 से स्टे लगाकर मामला लटकाया गया है और 2008 से साधारण कागजों के आधार पर पट्टा दिखाकर निजी स्कूल चलाया जा रहा है.
फोन कॉल से शुरू हुआ दोनों अधिकारियों में विवाद
नजूल जमीन के इस केस को लेकर देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने सिविल जज शबीना खान को फोन किया. कमिश्नर का कहना था कि वे केवल यह जानना चाहती थीं कि जज छुट्टी से कब लौट रही हैं. हालांकि, बातचीत के दौरान बात बिगड़ गई. सिविल जज शबीना खान ने 15 जुलाई 2026 को आई इस कॉल पर आपत्ति जताई और 4 अगस्त 2026 को जनपद न्यायाधीश को पत्र लिखकर खुद को इस केस से अलग करने का अनुरोध किया.
सिविल जज ने लगाए प्रशासनिक दबाव के गंभीर आरोप
सिविल जज शबीना खान ने अपने पत्र में बताया कि कमिश्नर ने फोन पर मुकदमे को लेकर बात करने की इच्छा जताई. जज के मना करने और सरकारी वकील के माध्यम से पक्ष रखने की बात कहने पर भी कथित तौर पर नाराजगी जताई गई. जज ने आरोप लगाया कि कमिश्नर ने अपने पद का प्रभाव दिखाकर डराने, केस ट्रांसफर करवाने और शिकायत करने की धमकी देकर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे वे मानसिक रूप से आहत हुईं.
कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने पत्र में दी अपनी सफाई
विवाद के बाद कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल ने भी हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज को पत्र भेजा. उन्होंने लिखा कि नजूल की जमीन पर सरकारी भवन बनना प्रस्तावित है. जब उन्हें पता चला कि पीठासीन अधिकारी लंबे अवकाश पर हैं, तो उन्होंने केवल प्रशासनिक जानकारी के लिए फोन किया था. कमिश्नर का आरोप है कि जज ने उनके प्रति अदालत में अशोभनीय और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया, जो आचरण नियमावली के खिलाफ है.
मामला पहुंचा हाईकोर्ट, कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
इस प्रशासनिक और न्यायिक खींचतान के बीच ज्योति विद्या मंदिर स्कूल प्रबंधन केस को देवीपाटन मंडल से बाहर भेजने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया. सुनवाई के दौरान पता चला कि जिला जज पहले ही केस को नवीन एडीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर कर चुके हैं, जिस पर हाईकोर्ट ने केस को अन्यत्र न भेजने का आदेश दिया. हालांकि, कमिश्नर द्वारा सिविल जज को फोन करने के मामले का हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया.
कमिश्नर की कानूनी मुश्किलें बढ़ने के आसार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पुरानी नज़ीरों का हवाला देते हुए इस घटनाक्रम को प्रथम दृष्ट्या अदालत के कामकाज में प्रशासनिक हस्तक्षेप माना है. कोर्ट ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उचित आपराधिक अवमानना पीठ के सामने पेश करने का निर्देश दिया है. दूसरी ओर, सूचना विभाग के माध्यम से कमिश्नर की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनका मकसद केवल सरकारी जमीन की सुरक्षा और केस की प्रशासनिक स्थिति जानना था, वे न्यायपालिका की गरिमा का पूरा सम्मान करती हैं.
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