देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश की राजनीति बेहद अहम मानी जाती है, जिसे सालों से चलाने वाले परिवार में एक परिवार मुलायम सिंह यादव का परिवार भी है. जो बीते कुछ दिनों से चर्चा में बना हुआ है. इसी परिवार का हिस्सा टूटा तो तरह-तरह के कयास लगने लगे. हम बात कर रहे हैं मुलायम सिंह के सौतेले बेटे और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की, जो अपनी पत्नी अपर्णा यादव को सोशल मीडिया पर खरी-खोटी सुना रहे हैं. वैसे इससे भी ज्यादा चर्चा अगर किसी बात की हो रही है तो वो है अखिलेश और प्रतीत यानी दो भाईयों के रिश्ते की.
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चर्चा ये कि सालों से जो दो भाइयों के बीच दूरी का कारण बन रहा था वो अब नहीं रहेगा. अगर आप सोच रहे हैं कैसे तो इसी पर चर्चा करने के लिए ही तो हम चर्चित चेहरा में यादव परिवार, अखिलेश और प्रतीक से जुड़ी कहानी लेकर आए हैं. कैसे प्रतीक और अपर्णा के तलाक से दो भाइयों के बीच घटती दूरी चर्चा, कौन है अखिलेश के सौतेले भाई प्रतीक जिन्हें अखिलेश भी देते हैं अहमियत, क्या है मुलायम सिंह की दूसरी शादी की कहानी जब 20 साल छोटी साधना गुप्ता को बनाया दुल्हन. बताएंगे सब चर्चित चेहरा में.
अपर्णा और प्रतीक की तलाक की खबरें
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव को लेकर तलाक की खबरों ने अचानक सबको चौंका दिया है.. यह मामला तब चर्चा में आया, जब प्रतीक यादव के इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट सामने आई, जिसमें शादी तोड़ने की बात कही गई थी. इस पोस्ट में अपर्णा यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए गए. यह भी आरोप लगाया गया कि सिर्फ खुद को मशहूर करने के लिए उन्होंने प्रतीक के माता-पिता और भाई के साथ रिश्तों में दरार पैदा कर दी.
इसके अलावा भी प्रतीक ने कई दावे किए और ये बात उन्होंने अपने बच्चों की कसम खाकर कही है. पोस्ट में अपर्णा को सबसे स्वार्थी और झूठी महिला तक कहा गया. इन चौंकाने वाले आरोपों के सामने आने के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया लेकिन कुछ ही देर बाद इसमें नया मोड़ आ गया, जब अपर्णा के परिवार की तरफ से सफाई दी गई कि प्रतीक का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया था. जिसकी वजह से प्रतीक उनमें बदलाव नहीं कर पा रहे हैं.
अफवाहों और हैकिंग के दावों के बीच उलझा सोशल मीडिया
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और हैकिंग के दावों के बीच उलझा हुआ है, लेकिन इस घटना के बाद से दो भाईयों के रिश्ते और उनके परिवार को लेकर चर्चा जबरदस्त हो गई है. प्रतीक और अपर्णा की तलाक की खबरों के बीच अब बातें यहां तक हो रही हैं कि अगर ऐसा होता है तो भाइयों के बीच सालों से जो दूरी बन गई थी वो खत्म हो जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि यादव परिवार की छोटी बहू होते हुए भी अपर्णा ने साल 2022 में बीजेपी का दामन थाम लिया था और कहीं न कहीं ये दो भाइयों के बीच दूरी आने का भी एक बड़ा कारण बना.
बीजेपी में शामिल हो गई थीं अपर्णा
साल 2017 में अपर्णा ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन BJP उम्मीदवार रीता बहुगुणा जोशी से हार गईं. वो 2022 में फिर से टिकट चाह रही थीं, लेकिन चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल हो गईं. लंबे इंतजार के बाद, सितंबर 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया.
अगर बात उनके और अखिलेश यादव के रिश्ते की करें तो दोनों भाइयों के बीच मजबूत और भरोसेमंद बॉन्ड देखने को मिलता है. भले ही प्रतीक राजनीति से दूर हों, लेकिन वह हमेशा अपने बड़े भाई अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आते हैं. परिवार के प्रति उनकी सोच और आपसी समझ इस बात को दिखाती है क्योंकि सौतेले भाई होने के बावजूद कभी दो भाइयों के बीच तकरार देखने को नहीं मिली. वैसे अपने प्रोफेशन के तौर पर प्रतीक ने राजनीति से अलग रास्ता चुना और रियल एस्टेट के बिजनेस में अपनी पहचान बनाई.
राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद प्रतीक यादव हमेशा लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. वो न तो राजनीति में एक्टिव हैं और न ही सार्वजनिक मंचों पर ज्यादा नजर आते हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर वो काफी एक्टिव रहते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शेयर करते रहते हैं.
सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं प्रतीक
इनमें कभी वो कार चलाते दिखते हैं तो कभी जिम में पसीना बहाते प्रतीक रेगुलर जिम जाते हैं, बॉडी बिल्डिंग के प्रति उनका जुनून ऐसा कि लखनऊ में वो एक बेहद मॉडर्न जिम भी चलाते हैं. साल 2012 में उन्हें एक मैगजीन की ओर से द इंटरनेशनल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ द मंथ का खिताब भी मिल चुका है. इसके अलावा प्रतीक को कार रेसिंग और लग्जरी गाड़ियों का भी जबरदस्त शौक है. कार रेसिंग उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक जुनून है.
वैसे प्रतीक को टैटूज का भी शौक है. हालांकि, उनकी तेज और स्टाइलिश लाइफस्टाइल के पीछे एक सॉफ्ट साइड भी है, प्रतीक को जानवरों से खास लगाव है और वो एनिमल वेलफेयर से जुड़े मुद्दों का भी समर्थन करते हैं, जो घायल या बेसहारा जानवरों की मदद के लिए आगे आते हैं. प्रतीक ने यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री हासिल की है. 7 जुलाई 1987 को साधना गुप्ता और चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर जन्में प्रतीक के माता-पिता शादी के दो साल बाद ही अलग हो गए थे.
अस्पताल में हुई थी मुलायम और साधन की मुलाकात
कहते हैं कि प्रतीक की मां साधना गुप्ता से पहली बार मुलायम सिंह की मुलाकात तब हुई थी जब वो अस्पताल में अपनी मां का इलाज करवा रहे थे. तब बतौर नर्स साधना गुप्ता सपा नेता की मां मूर्ति देवी की अच्छे से देखभाल करती थीं. सूबे की राजनीति में अपनी दमखम रखने वाले मुलायम इसी वजह से साधना गुप्ता से खासे प्रभावित हुए और यहीं से दोनों एक दूसरे के करीब आ गए.
यह भी कहा जाता है कि साल 1994 में प्रतीक यादव के स्कूल फॉर्म में पिता के नाम पर एमएस यादव और पते की जगह मुलायम सिंह यादव के ऑफिस का पता दिया हुआ था. यह भी कहा जाता है कि साल 2000 में प्रतीक के अभिभावक के रूप में मुलायम का नाम दर्ज हुआ था. साल 2003 में मुलायम की पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद मुलायम ने साधना को अपनी पत्नी का दर्जा दिया था.
पहलवान और शिक्षक के तौर पर करियर की शुरुआत
मुलायम सिंह यादव ने अपने करियर की शुरुआत एक पहलवान और शिक्षक के तौर पर की थी और बाद में लोहियावादी राजनीति से जुड़े. साल 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की, जो आज देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शामिल है. मुलायम सिंह यादव अपने पांच भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर थे, उनके भाइयों में रतन सिंह, अभय राम सिंह, राजपाल सिंह और सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव शामिल हैं. उनकी एक बहन कमला देवी थीं. चचेरे भाई रामगोपाल यादव भी परिवार का राजनीतिक चेहरा हैं.
मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी से उनके बेटे अखिलेश यादव हैं, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं.. दूसरी पत्नी साधना गुप्ता से उनके बेटे प्रतीक यादव हैं, जो राजनीति से दूर रहकर बिजनेस करते हैं. कहा जाता है कि इस परिवार के 25 से ज्यादा सदस्य किसी न किसी रूप में राजनीति से जुड़े रहे हैं.
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