कानपुर से सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट केस ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे भी हो रहे है. अब इस मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि ओटी टेक्नीशियन अली और एंबुलेंस ड्राइवर शिवम खुद डॉक्टर बनकर पूरे गैंग को चला रहे थे. वो लोग डॉक्टर की तरह बर्ताव करते और मरीजों का चेकअप भी करते थे. शिवम का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वह दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का किडनी ट्रांसप्लांट करने के बाद उससे हालचाल पूछ रहा है. हालांकि पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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'हाउ आर यू अरेबिका...'
मामले का खुलासा होते ही पुलिस ने पहले दिन ही अहूजा हॉस्पिटल के डॉक्टर सुरजीत सिंह और उनकी पत्नी डॉक्टर प्रीति आहूजा के साथ एंबुलेंस चालक शिवम को गिरफ्तार किया गया था. जांच के दौरान पुलिस को शिवम के मोबाइल फोन से एक वीडियो मिला, जो कि 3 मार्च को कानपुर में दक्षिण अफ्रीका की महिला अरेबिका के किडनी ट्रांसप्लाट का है. ट्रांसप्लांट के बाद जब महिला की तबीयत बिगड़ी तो शिवम डॉक्टर बनकर उसको चेक करने पहुंचा और पूछा 'हाउ आर यू अरेबिका'. हैरान करने वाली बात यह है कि वह डॉक्टर की तरह ही बर्ताव कर रहा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है.
डॉ. अली निकला फर्जी
इस मामले में पुलिस ने जब दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप और राजेश को गिरफ्तार किया तो एक और बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि ऑपरेशन दिल्ली के डॉक्टर मुदस्सर अली करते थे. पुलिस ने अली की कुंडली निकाली और उसके घर पहुंच गई तो पता चला कि अली डॉक्टर नहीं है एक अस्पताल में ओटी टेक्नीशियन है. फिलहाल अली फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है.
कैसे हुआ मामले का भंडाफोड़?
कानपुर पुलिस ने 31 मार्च को बगैर परमिशन के मेरठ की एक महिला पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट करने के आरोप में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था. उसकी किडनी देने वाला बिहार का आयुष था और 6 लाख में यह सौदा हुआ था. लेकिन जब युवक को तय रकम से कम पैसा मिला तो यह मामला पुलिस के पास पहुंचा. फिर पुलिस ने पहले दोनों को कानपुर में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और फिर बाद में इलाज के लिए लखनऊ भेज दिया.
पुलिस कमिश्नर का बयान: कई और बड़े नाम रडार पर
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल और डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि इस गैंग के तार लखनऊ, मेरठ, दिल्ली और कन्नौज तक फैले हुए हैं. पुलिस ने अब तक तीन ओटी टेक्नीशियन चिह्नित किए हैं, जिनमें से दो जेल जा चुके हैं. जांच अधिकारी अब उन बड़े डॉक्टरों और अस्पतालों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं, जो किसी भी रूप से इस काले कारोबार से जुड़े हुए या बढ़ावा दे रहे थे.
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