Kanpur Lamborghini accident: कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे के मामले में अब आरोपी शिवम मिश्रा के कारोबारी पिता की एंट्री हो गई है. शिवम के पिता के. मिश्रा ने इस पूरे मामले में पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है. हमारे सहयोगी आजतक से बात करते हुए शिवम के पिता ने दावा किया कि दुर्घटना के समय कार उनका ड्राइव रहा था. पिता ने कहा कि शिवम सिर्फ कार का ट्रायल लेने के लिए ड्राइवर के साथ गया था. उन्होंने कहा कि उनका परिवार किसी भी तरह के अपराध में शामिल नहीं है और वे कानून का पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं.
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कौन चला रहा था लैंबॉर्गिनी? पिता ने बताया
शिवम के पिता के.के. मिश्रा ने अनुसार हादसे के समय कार उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था. उन्होंने बताया कि कार में कुछ तकनीकी खराबी थी जिसे ठीक करने मिस्त्री आए थे. अगले दिन शिवम ड्राइवर के साथ कार का ट्रायल लेने निकला था. पिता का दावा है कि जब कार वापस लौट रही थी तभी शिवम की तबीयत खराब होने लगी और वे ड्राइवर की तरफ झुकने लगे. उन्हें संभालते समय ड्राइवर का ध्यान भटका और ये हादसा हो गया.
घायल तौफीक अहमद का अदालत में यू-टर्न?
इस मामले में शिवम के वकील धर्मेंद्र सिंह ने दावा कि हादसे में जिस तौफीक अहमद के घायल होने पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी, उसने अदालत में लिखित हलफनामा दे दिया है. तौफीक का कहना है कि उसने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है. उन्होंने कहा कि पुलिस के पास मौजूद प्रार्थना पत्र पर उसके दस्तखत भी नहीं हैं.
यहां देखें पूरा विडियो
वायरल वीडियो और पुलिस की बैरंग वापसी
भले ही पिता और वकील दावा कर रहे हों कि शिवम कार नहीं चला रहा था, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो कहानी कुछ और ही बयां कर रहा है. 15 सेकंड के इस वीडियो में दिख रहा है कि बाउंसर शिवम को कार की ड्राइविंग सीट से बाहर खींच रहे हैं और उसे गोद में उठाकर ले जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ, सोमवार को जब पुलिस पूछताछ के लिए शिवम के घर पहुंची, तो अंदर से दरवाजा ही नहीं खोला गया, जिसके बाद पुलिस को आधे घंटे इंतजार कर वापस लौटना पड़ा.
जमानत की तैयारी और कानूनी पेच
शिवम मिश्रा के वकील अब इस मामले को पूरी तरह से सामान्य एक्सीडेंट की धारा में देख रहे हैं. उनका तर्क है कि जब शिवम गाड़ी चला ही नहीं रहा था तो उन पर कोई गंभीर मामला नहीं बनता. इस बीच खबर है कि बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका भी दाखिल की जा रही है. शुरुआती दौर में एफआईआर में नाम न होने और फिर नाम जुड़ने के बाद अब जिस तरह से गवाह और परिवार के बयान बदल रहे हैं, उससे यह हाई प्रोफाइल मामला और उलझता जा रहा है.
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