कौन है बासित अली जिन्हें बीजेपी की केंद्रीय टीम में बनाया गया मुस्लिम चेहरा, कभी सिर्फ BJP जॉइन करने पर पिता ने की थी जमकर पिटाई

न्यूज तक डेस्क

• 12:46 PM • 25 Aug 2026

पिता और समाज के भारी विरोध का सामना करने वाले बासित अली ने कभी हार नहीं मानी और 15 साल के लंबे संघर्ष के बाद बीजेपी के सबसे प्रमुख मुस्लिम चेहरे के रूप में उभरकर अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला.

बीजेपी का मुस्लिम चेहरा बनकर उभरे कुंवर बासित अली (Photo-ITG)
बीजेपी का मुस्लिम चेहरा बनकर उभरे कुंवर बासित अली (Photo-ITG)
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बीजोपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने साल 2027 के चुनाव से पहले अपनी नई टीम बनाई है. बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में मेरठ के कुंवर बासित अली का भी नाम शुमार है. उन्हें राष्ट्रीय टीम में बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. अभी तक बासित मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर थे, लेकिन अब पार्टी की राष्ट्रीय टीम में मोर्चे के अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. 

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राजनीति में जब विचारधारा और सामाजिक धाराएं आमने-सामने आ जाएं तो रास्ता सिर्फ सियासी नहीं रह जाता बल्कि अस्तित्व और पहचान का एक बड़ा संघर्ष बन जाता है. मेरठ के एक छोटे से गांव कायस्थ बड्ढा से निकलकर बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने वाले कुंवर बासित अली की दास्तान कुछ ऐसी ही तपिश और संघर्ष में ढली है.

2011 में बीजेपी में जानें का लिया फैसला 

बात 15 साल पुरानी है साल 2011 में बासित अली ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया था. उस दौर में किसी मुस्लिम युवक का बीजेपी का झंडा उठाना आसान नहीं था. मेरठ के तत्कालीन सांसद राजेंद्र अग्रवाल से सदस्यता लेते ही बासित के अपने घर में भूचाल आ गया. बासित के पिता हामिद अली गांव के प्रधान थे और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर नेताओं मुनकाद अली और हाजी याकूब कुरैशी के करीबी माने जाते थे. अगले दिन जब अखबार में बेटे के बीजेपी में शामिल होने की खबर छपी तो पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. नाराजगी इस कदर बढ़ी कि पिता ने जूते और लाठियों से बासित की पिटाई कर दी.

2012 का वो चुनावी किस्सा और ईदगाह की रात

2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय एक अजीब स्थिति बन गई. पिता के प्रभाव के कारण घर पर बसपा का कार्यक्रम तय था. उसी दिन बीजेपी जिलाध्यक्ष के कहने पर शाम को बीजेपी नेता जय पाल सिंह का कार्यक्रम भी उसी जगह रख दिया गया. सुबह पिता ने बसपा नेताओं के साथ बैठक की और किठौर क्षेत्र में प्रचार के लिए निकल गए. शाम को जब उसी मंच पर बीजेपी का झंडा लहराया और यह खबर पिता तक पहुंची तो बासित को एक बार फिर लाठियां सहनी पड़ीं. 

पिता के खौफ से बासित अली को वो रात गांव के पास जंगल में स्थित ईदगाह में गुजारनी पड़ी थी. इसके बाद वे दो महीने तक घर नहीं लौटे थे. बाद में बहनोई की मध्यस्थता से उनकी घर वापसी हुई. हद तो तब हो गई जब किठौर में एक रोड शो के दौरान रथ पर सवार बासित को उनके पिता ने सरेबाजार लाठियों से मारना शुरू कर दिया. बासित वहां से भागे जरूर लेकिन इरादे नहीं बदले. उन्होंने पिता को साफ कह दिया कि वे बीजेपी का दामन किसी हाल में नहीं छोड़ेंगे. बेटे के इस अडिग फैसले को देखकर पिता ने आखिरकार चुप्पी साध ली और खुद भी बसपा से दूरी बना ली.

सामाजिक बहिष्कार का डर और ताने

बीजेपी से जुड़ते ही रिश्तेदारों ने बातचीत बंद कर दी और पड़ोसियों की निगाहें चुभने लगीं. विपक्षी दलों ने राजनीतिक ढाल कहकर तंज कसे तो समाज ने अघोषित रूप से अलग-थलग करने की कोशिश की, लेकिन बासित अली ने अपना ध्यान तानों पर नहीं बल्कि धरातल पर काम करने में लगाया.

चर्चों में आए और संगठन में बढ़ते गए कदम

बासित अली ने एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखा और संगठन में अपनी उपयोगिता साबित की:

  • 2012: जिला सह-मीडिया प्रभारी और बाद में अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने.
  • 2014 लोकसभा चुनाव: नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मुस्लिम समुदाय से दुआ का विशेष कार्यक्रम आयोजित कर सुर्खियों में आए.
  • सदस्यता अभियान: 2014 में ही एक ही दिन में 2,500 से ज्यादा मुस्लिम युवाओं को बीजेपी से जोड़कर अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाया.
  • राज्य उर्दू अकादमी: यूपी में बीजेपी सरकार बनने पर उन्हें उर्दू अकादमी का सदस्य बनाया गया.
  • नवोन्मेषी पहल: मदरसों में योग शिविर आयोजित कराने, 'मोदी मित्र' अभियान चलाने और पसमांदा तथा मुस्लिम राजपूत समाज के बीच चौपालें लगाने का श्रेय उन्हें ही जाता है.

यूपी अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर

उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बासित अली ने तीन तलाक कानून और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम किया. 15 सालों की इस तपस्या का नतीजा यह रहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें अपनी नई टीम में शामिल करते हुए 'बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा' का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कियाय जिस बेटे की बीजेपी में जाने पर कभी लाठियों से पिटाई हुई थी, आज वही पिता अपने बेटे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि और राष्ट्रीय स्तर पर मिली नई पहचान पर फक्र महसूस कर रहे हैं. बासित अली की यह यात्रा साबित करती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो वक्त और सोच दोनों को बदला जा सकता है.

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