लखनऊ अग्निकांड: SIT की जांच के बाद 18 अधिकारियों पर गिरेगी गाज, क्या अवैध इमारत पर चलेगा बुलडोजर?

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड मामले में एलडीए की जांच रिपोर्ट में 18 अधिकारियों व इंजीनियरों को दोषी पाया गया है, जिन पर अब कड़ी कार्रवाई की तैयारी है.

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

समर्थ श्रीवास्तव

follow google news

 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में स्थित एक एनिमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है. इस हादसे में 15 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं. अब इस पूरे मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसमें एक दो नहीं बल्कि पूरे 18 अधिकारियों और इंजीनियरों को दोषी पाया गया है. इसके साथ ही प्रशासन ने उस अवैध इमारत को जमींदोज करने की तैयारी भी शुरू कर दी है.

Read more!

एलडीए की जांच में 18 नामजद

अलीगंज अग्निकांड के बाद गठित की गई जांच में लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में साल 2016 से लेकर अब तक तैनात रहे अधिशासी अभियंता (Executive Engineers), कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineers) और कई तत्कालीन अधिकारियों सहित कुल 18 लोगों को दोषी पाया गया है. इन अधिकारियों पर नियमों को ताक पर रखकर बिल्डिंग को अनुमति देने और जांच न करने के गंभीर आरोप हैं.

नियमों की धज्जियां उड़ाकर खड़ी की गई थी इमारत

जांच रिपोर्ट में इस बात का साफ जिक्र है कि यह बिल्डिंग पूरी तरह से मानकों के विपरीत बनाई गई थी.

  • कमर्शियल इस्तेमाल: इस बिल्डिंग का नक्शा 'रेसिडेंशियल' (आवासीय) के तौर पर पास कराया गया था, लेकिन इसमें धड़ल्ले से 'कमर्शियल' (व्यावसायिक) गतिविधियां चलाई जा रही थीं.
  • फायर एनओसी नहीं: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी बिल्डिंग के पास कोई फायर एनओसी (Fire NOC) ही नहीं थी.
  • वेंटिलेशन और एग्जिट गायब: इमारत में न तो वेंटिलेशन की सही व्यवस्था थी और न ही आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई सेफ एग्जिट गेट था. 
  • बायोमेट्रिक लॉक बना काल: शुरुआती जांच में सामने आया कि बिल्डिंग में लगा बायोमेट्रिक ऑटो-लॉक सिस्टम आग लगने के दौरान बिजली कटने या तकनीकी खराबी के चलते जाम हो गया. इसके कारण अंदर फंसे छात्र-छात्राएं बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने व आग की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई. 

मनहूस इमारत पर चस्पा हुआ नोटिस

हादसे के बाद अब एलडीए एक्शन मोड में नजर आ रहा है. एलडीए ने उस इमारत पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा कर दिया है. भवन स्वामियों को 15 दिनों के भीतर जवाब देने की मोहलत दी गई है. यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के तहत इस अवैध और मनहूस इमारत को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त (सीज/जमींदोज) कर दिया जाएगा.

अब तक 4 गिरफ्तारियां

इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल हैं:

  • वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (बिल्डिंग का मालिक)
  • रामकृष्ण उपाध्याय (पेट शॉप संचालक)
  • तशांत कृष्ण जायसवाल (एनिमेशन सेंटर संचालक
  • सुरेश कुमार साहू (आईटी कंपनी ऑपरेटर)

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मौके का मुआयना किया था और दो सदस्यीय हाई लेवल एसआईटी (SIT) का गठन किया था. अब देखना यह होगा कि एलडीए की इस रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए गए 18 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर से कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है.


 

    follow google news