Lucknow Fire Accident: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में अब तक 15 लोगों की मौत हो गई है. इस पूरे मामले में अब पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. सरकार ने मामले की जांच के लिए IAS अमृत अभिजात और IPS प्रवीण कुमार की एक SIT गठित की है. वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भी मामलेद की जांच कर रहा है. इस बीच घटनास्थल पर मौजूद हमारे सहयोगी रिपोर्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से इस हादसे से जुड़ी बेहद हैरान करने वाली जानकारियां सामने आई हैं.
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हादसे की सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम दो गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंच गई थी. इसके बाद स्थिति को देखते हुए आसपास के अन्य इलाकों से भी दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं. फायर विभाग की टीम समय पर तो पहुंच गई थी. लेकिन मौके पर हालात इतने खराब थे कि चाहकर भी फायर फाइटर्स बिल्डिंग के अंदर एंट्री नहीं जा पा रहे थे.
एक ही एंट्री और एग्जिट पॉइंट होने से मुश्किल हुआ रेस्क्यू
आज तक के रिपोर्टर ने घटनास्थल के ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आने और जाने का केवल एक ही रास्ता था. एंट्री और एग्जिट पॉइंट एक होने के कारण जब आग लगी तो अंदर फंसे लोगों के निकलने और राहत टीम के अंदर जाने का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया. कॉम्प्लेक्स के अंदर आग लगने के बाद इतना धुआं भर गया था कि फायर टीम को अंदर जाने के लिए लगातार मशक्कत कर रही थी लेकिन अंदर नहीं जा पा रही थी. फायर टीम ने अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दूसरे फ्लोर तक पहुंचना जरूरी था लेकिन भारी धुएं ने टीम का रास्ता तरह रोक दिया था.
रास्ता बनाने के लिए पड़ोस की छत से बिल्डिंग में किए 4 छेद
ऐसे में जब मेन रास्ते से अंदर जाना नामुमकिन हो गया तो फायर टीम के लोग इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बगल में बने एक पड़ोसी के मकान की छत पर चढ़े. यह दीवार इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पड़ोस में बने मकान की छत से बिल्कुल सटी हुई थी. आनन फानन में फायर टीम ने पड़ोसी की छत का इस्तेमाल करके रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाने का फैसला किया.
फायर विभाग की टीम ने अंदर फंसे लोगों को निकालने और खुद अंदर घुसने के लिए बगल की दीवार को काटने का काम शुरू किया. टीम ने इस दीवार में अलग-अलग जगह पर 4 छेद किए जिनमें से तीन छेद साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं और एक छेद दूसरी तरफ है. इन छेदों को बनाकर ईंटों को वहां से हटाया गया ताकि अंदर भरा हुआ दम घोंटू धुआं बाहर निकल सके.
छेद के रास्ते निकाला गया अंदर फंसे लोगों को बाहर
दीवार में चार छेद बनाने के बाद जब धुआं थोड़ा कम हुआ तब दमकल कर्मी अंदर दाखिल हुए और राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सका. इन्हीं छेदों के रास्ते अंदर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. अगर फायर विभाग की टीम पड़ोस की छत का सहारा लेकर दीवार न काटती तो अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना बिल्कुल नामुमकिन हो जाता.
रिहायशी इलाके के बीचोबीच बना था यह कमर्शियल कॉम्प्लेक्स
घटनास्थल के आसपास के हिस्से को देखने पर साफ पता चलता है कि यह पूरा इलाका पूरी तरह से रिहायशी यानी रहने वाला इलाका है. इस कॉम्प्लेक्स के चारों तरफ लोगों के रहने के मकान बने हुए हैं और पास में ही एक स्कूल भी संचालित हो रहा है. इस पूरी रिहायशी कॉलोनी के बीच में यह कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाकर तैयार किया गया था जहां यह भीषण हादसा हुआ.


