'पापा मुझे बचा लो...' बेटे शाहजान की आखिरी पुकार सुन 10 मिनट में पहुंचे पिता, फिर भी नहीं बची जान, लखनऊ अग्निकांड की दर्दनाक कहानी

Lucknow fire incident: लखनऊ अग्निकांड में बाराबंकी के दो परिवारों की दुनिया उजड़ गई. मौत से पहले मोहम्मद शाहजान ने अपने पिता को फोन कर सिर्फ इतना कहा था, 'पापा मुझे बचा लो.' पिता दौड़ते हुए पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. वहीं ग्राफिक्स डिजाइनर अम्मार की मौत ने भी पूरे परिवार को तोड़ दिया.

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में बाराबंकी के दो युवकों की मौत
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में बाराबंकी के दो युवकों की मौत।

सैयद रेहान मुस्तफा

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Lucknow Fire Victims Story: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण आग्निकांड ने कई हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भूलने वाला गम दे दिया है. इस दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे में बाराबंकी जिले के दो युवकों मोहम्मद शाहजान और मोहम्मद अम्मार की भी जान चली गई है. देर रात जैसे ही दोनों युवकों के शव उनके पैतृक घर पहुंचे पूरे इलाके में कोहराम मच गया. अब बाराबंकी के दोनों परिवारों में मातम पसरा है. इकलौते बेटे शाहजान को खोने के बाद मां सदमे में है और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.

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बता दें कि बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे के रहने वाले मोहम्मद शाहजान क्लासरूम के अंदर ही फंस गए थे. यही से शाहजान ने अपने पिता मोहम्मद इमरान को फोन किया था. शाहजान ने फोन पर रोते हुए कहा था कि 'पापा मुझे बचा लो'. बेटे की यह आखिरी आवाज सुनकर पिता महज दस मिनट के भीतर दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंच गए थे, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी.

वीडियो बनाते रहे लोग, तड़पता रहा बेटा...

मृतक शाहजान के पिता मोहम्मद इमरान ने रोते हुए बताया कि पिता ने अंदर जाने की कोशिश की, लोगों से मदद मांगी, मिन्नतें कीं, लेकिन आग की लपटों के सामने वह बेबस हो गए. पिता का आरोप है कि वहां मौजूद लोग मदद करने के बजाय अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने में व्यस्त थे. उन्होंने लोगों से बहुत मिन्नतें कीं लेकिन कोई आगे नहीं आया.

आग से बचाव के नहीं थे कोई इंतजाम

पीड़ित पिता ने प्रशासन और कोचिंग प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कोचिंग सेंटर में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे. जिस कमरे में शाहजान मौजूद था उसका दरवाजा ऑटोमैटिक लॉक हो गया था. कमरे में अचानक धुआं भर जाने के कारण दम घुटने से शाहजान की मौत हो गई. पिता ने यह भी आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड की टीम बहुत देर से पहुंची.

इकलौते बेटे को खोकर सदमे में माता-पिता

मोहम्मद शाहजान अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. वह लखनऊ में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे थे और परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं. इस भीषण हादसे ने परिवार के सारे सपने और खुशियां एक झटके में छीन ली हैं. इकलौते चिराग के बुझ जाने के बाद से मां नसरीन फातिमा गहरे सदमे में हैं और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. देर रात शव पहुंचने पर सांत्वना देने के लिए रिश्तेदारों और समाजसेवियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

ग्राफिक्स डिजाइनर अम्मार भी हादसे का शिकार

इस भीषण अग्निकांड में बाराबंकी के गदिया निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की भी दर्दनाक मौत हो गई. अम्मार लखनऊ की उसी इमारत में एक ग्राफिक्स डिजाइनर के तौर पर काम कर रहे थे जहां यह कोचिंग सेंटर चल रहा था. जब इमारत में आग लगी तो अम्मार भी अंदर ही मौजूद थे और आग की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए जिससे उनकी जान चली गई.

गरीब परिवार का सबसे बड़ा सहारा छीना

मोहम्मद अम्मार अपने परिवार में सबसे बड़े बेटे थे और पूरे घर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उनके पिता मंसूर आलम वेल्डिंग का काम करके किसी तरह घर का गुजारा चलाते हैं. अपने बड़े बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद से ही अम्मार के घर और पूरे मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है. इस हादसे ने दोनों ही परिवारों को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है.

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