उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन के बाद अब राजनीति गर्मा गई है. शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के काफिले को दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर पुलिस ने रोक लिया. माता प्रसाद पांडे सपा के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नोएडा के उन मजदूरों से मिलने जा रहे थे, जिनके साथ हाल ही में हुई झड़प के दौरान कथित तौर पर ज्यादती हुई है. बॉर्डर पर भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) के जवानों की तैनाती के बीच सपा नेताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली.
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मजदूरों के शोषण और पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल
काफिला रोके जाने के बाद मीडिया से बात करते हुए माता प्रसाद पांडे ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि वह यहां किसी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने नहीं, बल्कि उन गरीब मजदूरों का हाल जानने आए हैं जिनका लंबे समय से कंपनियों में शोषण हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां मजदूरों से 12 से 24 घंटे काम करवा रही हैं, जो कि लेबर एक्ट का खुला उल्लंघन है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब लेबर इंस्पेक्टर और डिप्टी लेबर कमिश्नर इन समस्याओं को हल करने में नाकाम रहे और मामला बढ़ गया, तो मजदूरों पर लाठीचार्ज क्यों किया गया?
'पाकिस्तान कनेक्शन' और 'टूलकिट' के दावों पर पलटवार
सरकार द्वारा इस प्रदर्शन के पीछे 'पाकिस्तान कनेक्शन' और 'टूलकिट' जैसे षड्यंत्रों के दावों पर माता प्रसाद पांडे ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'मैं इसके बारे में नहीं जानता. अगर सरकार को पता है कि पाकिस्तान का हाथ है, तो वे पाकिस्तानियों को पकड़ें और दंड दें, हमने उन्हें कब रोका है? हम तो केवल उन मजदूरों से मिलने आए हैं जिनके हाथ-पैर टूटे हैं, जिनके घर उजाड़े गए हैं और जिन पर फर्जी मुकदमे लिखकर उन्हें जेलों में डाल दिया गया है.' उन्होंने आगे कहा कि सरकार मजदूरों के प्रति कोई सद्भाव नहीं रखती और केवल बड़ी कंपनियों के हितों के लिए काम कर रही है.
बॉर्डर पर सुरक्षा सख्त, पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका
नोएडा में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद से पुलिस प्रशासन बेहद सतर्क है. दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर डीसीपी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में भारी सुरक्षा घेरा बनाया गया था. पुलिस का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी राजनीतिक डेलीगेशन को प्रभावित क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. माता प्रसाद पांडे की गाड़ी को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया और उन्हें आगे बढ़ने से मना कर दिया. सपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि सरकार विपक्ष को सच जानने से रोक रही है.
लापता मजदूरों और फर्जी मुकदमों का लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि लाठीचार्ज के बाद से कई मजदूर लापता हैं. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक पिता अपने बेटे को ढूंढ रहा है, जो केवल खाना देने आया था और पुलिसिया कार्रवाई के बाद से उसका कोई पता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने निर्दोष लोगों को पकड़कर बंद कर दिया है और उन पर गंभीर धाराओं में फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं. माता प्रसाद पांडे ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी मजदूरों के हक की लड़ाई जारी रखेगी और इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी.
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