Meerut Shastri Nagar Central Market: मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद से खलबली मची हुई है. दरअसल, सोमवार को अदालत ने यहां के आवासीय प्लॉटों पर चल रहे बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, स्कूल, नर्सिंग होम और बैंकों को सील करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने 44 ऐसी संपत्तियों को चिन्हित किया है जिन्हें सील किया जाना है. इनमें 6 स्कूल, 6 निजी अस्पताल/नर्सिंग होम और 4 बैंकट हॉल शामिल हैं. इस फैसले के बाद से व्यापारियों, डॉक्टरों और स्कूल संचालकों के बीच हडकंप मचा हुआ है.
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वहीं बाकी 28 इमारतों का इस्तेमाल पूरी तरह से व्यापारिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का दाखिला दूसरी जगह कराया जाए. अस्पतालों में भर्ती मरीजों को कहीं और शिफ्ट किया जाए. आदेश मिलते ही आवास विकास परिषद की टीम ने व्यापारियों को भवन खाली करने की सूचना दे दी है. इस अब व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है.
व्यापारियों का विरोध और सामूहिक बैठक
इस आदेश के बाद से पूरे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है. सीलिंग की खबर जैसे ही फैली सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने शाम को एक संयुक्त बैठक की. इस बैठक में स्कूल मैनेजमेंट और डॉक्टर भी शामिल हुए. सभी ने सीलिंग की कार्रवाई का विरोध करने का फैसला लिया है. बताया जा रहा है कि शास्त्री नगर के सेक्टर 1 से 13 तक कुल 1400 से ज्यादा दुकानों हैं जिन्हें चिह्नित किया गया है जो नियमों के विरुद्ध बनी हैं. वहीं कोर्ट के इस आदेश के बाद कुछ व्यापारियों ने अपनी दुकानों से सामान हटाना भी शुरू कर दिया है. व्यापारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स और जीएसटी भर रहे हैं फिर भी उनके रोजगार को उजाड़ा जा रहा है.
करोड़ों रुपये जमा करने के बाद भी राहत नहीं
व्यापारियों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भू परिवर्तन योजना के तहत उन्होंने लैंड यूज चेंज कराने के लिए आवास विकास परिषद में लगभग 70 करोड़ रुपये जमा किए थे. इसके बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली. व्यापारी नेताओं का कहना है कि आवास विकास के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष ठीक से नहीं रखा और उल्टा 44 नए भवनों की लिस्ट सौंप दी. व्यापारियों ने उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है जिनके कार्यकाल में ये निर्माण हुए थे.
विधायक अतुल प्रधान ने सरकार को घेरा
सपा विधायक अतुल प्रधान भी व्यापारियों के समर्थन में मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि यह केवल मेरठ की नहीं बल्कि पूरे देश की समस्या है क्योंकि रोजगार की कमी के कारण लोग रिहायशी इलाकों में छोटे व्यापार कर रहे हैं. प्रधान ने मांग की कि सरकार को संसद में कानून लाकर इन व्यापारियों को बचाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों की मदद करती है और छोटे व्यापारियों की सुध नहीं ले रही है. विधायक ने केंद्र सरकार से इसे नौवीं अनुसूची में डालकर राहत देने की अपील की है.
अब 9 अप्रैल पर टिकी नजरें
इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीमें मुस्तैद हैं. सीलिंग की कार्रवाई के लिए फायर ब्रिगेड और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है जिसे देखकर व्यापारी डरे हुए हैं. व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन उन्हें अपराधियों की तरह देख रहा है. इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होनी है और तब तक पूरे बाजार में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है.
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