Meerut Police Busted Extortion Gang : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से ठगी और ब्लैकमेलिंग का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था और बाद में खुद को पुलिस अधिकारी व पत्रकार बताकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था.
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इंस्टाग्राम पर लड़की बन करते थे दोस्ती, फिर दफ्तर बुलाकर वसूली
मामले की शुरुआत पीड़ित नीरज पाल की शिकायत से हुई. पीड़ित ने ब्रह्मपुरी थाने में तहरीर देकर बताया कि आरोपियों ने उससे रंगदारी मांगी और डरा-धमकाकर उसके खाते से 10,000 रुपये अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए. इसके साथ ही 2 लाख रुपये और न देने पर फर्जी पुलिस केस में फंसाने की धमकी दी. पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह इंस्टाग्राम पर लड़की के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से चैट करता था. जब सामने वाला मिलने के लिए तैयार होता, तो उसे मोहकमपुर स्थित अपने एक दफ्तर में बुलाया जाता था.
फर्जी CO, SO और पत्रकार बनकर बनाते थे दबाव
दफ्तर पहुंचने पर पीड़ित को बताया जाता था कि जिससे वह बात कर रहा था, वह लड़की अंदर बैठी है. इसके बाद पीड़ित की तस्वीरों को मॉर्फ कर या एडिटेड वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया जाता था. यदि पीड़ित दबाव में न आए तो गिरोह के सदस्य खुद को फर्जी CO, फर्जी SO, दरोगा या फर्जी पत्रकार बताकर पुलिसिया कार्रवाई और मुकदमे का डर दिखाकर लाखों रुपये की मांग करते थे.
सोशल मीडिया पर 'फर्जी पुलिस चौकी' के दावों का पुलिस ने किया खंडन
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन दावों पर कि शहर में पूरी 'फर्जी पुलिस चौकी' चल रही थी, मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने स्थिति साफ की. उन्होंने बताया कि यह कोई फर्जी पुलिस चौकी नहीं थी, बल्कि आरोपियों का एक निजी कार्यालय (दफ्तर) था, जहां से वे हनी ट्रैप का गिरोह चला रहे थे. पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने जाल बिछाकर गिरोह के सरगना राहुल पाल और उसके साथी आकाश को गिरफ्तार कर लिया है.
मौके से वॉकी-टॉकी, बीट बुक और मोहरें बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से एक बिना नंबर की कार, लैपटॉप, टैबलेट, वॉकी-टॉकी, बीट बुक, फर्जी मोहरें और नेमप्लेट बरामद की हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में शामिल दो अन्य सहयोगियों को वांछित घोषित किया गया है, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है. पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य पीड़ितों और सहयोगियों का पता लगाया जा सके.
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