उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बुधवार देर रात पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई कर कुख्यात अपराधी और शार्प शूटर आशू उर्फ मोंटी चड्ढा को ढेर कर दिया है. मोंटी ने बीते महीने ही एक निर्यातक(Exporter) से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी, जिसके बाद से ही यह मामला सुर्खियों में बना हुआ था. लेकिन मोंटी के एनकाउंटर के बाद सवाल उठने लगे है कि आखिर कौन है यह मोंटी चड्ढा, जिससे पूरा वेस्ट यूपी कांपता था? साथ ही कैसे इसने जुर्म की दुनिया में कदम रखा और फिर बन गया उधम सिंह गैंग का हिस्सा? आइए विस्तार से जानते है इन्हीं सवालों के जवाब.
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कौन है आशू उर्फ मोंटी चड्ढा?
मिली जानकारी के मुताबिक, आशू उर्फ मोंटी चड्ढा यूपी के हापुड़ जिले के हाफिजपुर थाना क्षेत्र के मीरापुर गांव का रहने वाला था. मोंटी ने काफी कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था. सबसे पहले 2010 में उसने अपने गांव के ही एक व्यक्ति पप्पू की फावड़े से मारकर हत्या कर दी थी. इस वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी, लेकिन पप्पू की पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. उस वक्त लगभग एक साल तक छापेमारी करने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया था.
उधम सिंह गैंग में कैसे हुई एंट्री?
जब मोंटी पप्पू के मर्डर केस में जेल गया तो वहां उसकी मुलाकात कु्ख्यात उधम सिंह गैंग से हुई. यहीं से मोंटी ने अपराध की दुनिया में कदम रखा जिसके बाद उसने अपना दबदबा बढ़ाना शुरू कर दिया. साल 2012 में पेरौल पर बाहर आकर मोंटी उधम सिंह गैंग में शामिल हो गया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
उधम सिंह गैंग में शामिल होने के बाद उसने आतंक मचाने शुरू किया और पश्चिम उत्तर प्रदेश और एनसीआर में अपना खौफ कायम कर लिया. उसने मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़ और गाजियाबाद जैसे जिलों में रंगदारी, फिरौती, सुपारी लेकर हत्या करने के साथ-साथ बड़ी लूट की वारदातों को अंजाम देता रहा.
गिरफ्तारी भी हुई लेकिन दबदबा बनाए रखा
साल 2014 में मेरठ के सरधना और सरूरपुर थाना क्षेत्रों में हुई गैंगवार की दो हत्याओं में आशू उर्फ मोंटी का नाम सामने आया. पुलिस ने इन मामलों में उसे गिरफ्तार भी किया, लेकिन वह कहां रुकने वाला था. जेल से बाहर आते ही वह एक बार फिर अपराध की दुनिया में एक्टिव हो गया और वारदातों को अंजाम देता रहा.
2016 में गाजियाबाद के कविनगर और इंद्रापुरम इलाके में लूट और चोरी के मामलों में भी उसकी गिरफ्तारी हुई. फिर 2017 में हत्या के प्रयास के एक मामले में मोंटी वांछित रहा. धीरे-धीरे उसके दबदबे और काम करने के तरीके की वजह से वह उधम सिंह गैंग का भरोसेमंद शार्प शूटर बन गया, जो रंगदारी नहीं मिलने पर सीधे हत्या जैसी वारदात को अंजाम देने के लिए फेमस हुआ.
नाम सुनते ही दहशत में आ जाते थे लोग
अपराध की दुनिया की इसी कड़ी में उसने मुरादाबाद के बड़े निर्यातक को अपना निशाना बनाया. मोंटी ने अपने नेटवर्क की मदद से शहर के बड़े निर्यातक अरशू ढल का मोबाइल नंबर निकाला और फिर व्हाट्सएप के जरिए 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगनी शुरू कर दी. इस दौरान उसने गाली-गलौज की और कारोबारी के फर्म हाउस के बाहर फायरिंग भी हुई.
पुलिस के मुताबिक, आशू उर्फ मोंटी चड्ढा का नाम सुनते ही कारोबारी दहशत में आ जाते थे, क्योंकि सबको पता था कि वह अपने इरादों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था. यहीं वजह थी कि उसका खौफ वेस्ट यूपी और एनसीआर में फैला हुआ था.
पुलिस कर रही कार्रवाई
इस मामले में एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि बुधवार की रात पुलिस को सूचना मिली की आरोपी रंगदारी की रकम लेने के लिए मुरादाबाद पहुंचा है. इस पर एसटीएफ और पुलिस ने उसे घेर लिया. जैसे ही मोंटी को इस बात का पता चला तो उसने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की जिसमें मोंटी को दो गोलियां लगी और वह वहीं गिर गिया. गंभीर हालात में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
फिलहाल पुलिस इस गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा.
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