उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी और जमीनी संघर्ष के लिए पहचानी जाने वाली विधायक पल्लवी पटेल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. लखनऊ की सड़कों पर एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा उनके साथ की गई कथित बर्बरता की तस्वीरों ने सियासी गलियारों में उबाल ला दिया है. यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लागू करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरीं पल्लवी पटेल को जिस तरह से पुलिस ने हिरासत में लिया, उसने सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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प्रदर्शन के दौरान तीखी झड़प और पुलिस का एक्शन
लखनऊ में आयोजित इस विरोध मार्च के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पल्लवी पटेल अपने समर्थकों के साथ रिजर्व पुलिस लाइन से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थीं. पुलिस द्वारा भारी बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता रोके जाने के बाद विधायक वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गईं. इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच जमकर नारेबाजी हुई. विवाद तब और बढ़ गया जब पुलिस पल्लवी पटेल को जबरन उठाने पहुंची. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पुलिस कर्मियों ने उन्हें गाड़ी में बैठाते समय उनके बाल खींचकर बर्बरता दिखाई. इस घटना के बाद उन्हें हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया गया.
अखिलेश यादव का हमला
पल्लवी पटेल के साथ हुई इस घटना पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का बयान भी चर्चा में है. पल्लवी पटेल, जो 2022 का चुनाव सपा के सिंबल पर जीतकर विधायक बनी थीं, उनके और अखिलेश के बीच पिछले कुछ समय से दूरियां देखी जा रही हैं. इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने एक तीखा तंज कसा. उन्होंने कहा कि 'जो भी भाजपा के करीब जाएगा, उसके साथ ऐसा ही व्यवहार होगा.' अखिलेश का यह बयान पल्लवी पटेल की हालिया राजनीतिक गतिविधियों और भाजपा से उनकी संभावित नजदीकियों की अटकलों की ओर इशारा करता है.
पल्लवी पटेल की कहानी
पल्लवी पटेल का सियासी सफर सड़क पर संघर्षों की कहानियों से भरा रहा है. पिछले साल वाराणसी में एक पटेल समाज के युवक की हत्या के मामले में उन्होंने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भारी बवाल काटा था, जहां वे पुलिस की बैरिकेडिंग फांदकर आगे बढ़ गई थीं. इसी तरह, फतेहपुर के एक मामले में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए उन्होंने पुलिस को चकमा देते हुए चेहरे पर कपड़ा बांधकर करीब 22 किलोमीटर तक बाइक से सफर किया था. सिराथू विधानसभा सीट पर उन्होंने जिस तरह से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराया, उसने उन्हें राज्य की राजनीति में ओबीसी समाज के एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया.
पारिवारिक विरासत और पार्टी के वर्चस्व की जंग
पल्लवी पटेल कुर्मी समाज के बड़े नेता रहे सोनेलाल पटेल की बेटी हैं और उनकी शिक्षा-दीक्षा विज्ञान विषय में डॉक्टरेट (पीएचडी) तक हुई है. उनके राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा मोड़ पिता के निधन के बाद आया, जब पार्टी की विरासत को लेकर उनकी अपनी बड़ी बहन और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ अनबन शुरू हो गई. यह विवाद इतना बढ़ा कि पिता द्वारा स्थापित पार्टी दो धड़ों में बंट गई- अपना दल (सोनीलाल) और अपना दल (कमेरावादी). पल्लवी अपनी मां कृष्णा पटेल के साथ मिलकर अपना दल (कमेरावादी) का नेतृत्व कर रही हैं और लगातार पिछड़े समाज के मुद्दों पर सरकार को घेरती रही हैं.
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