Fact Check: क्या BJP सांसद निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से मांगी माफी? जानिए सोशल मीडिया पर वायरल लेटर का पूरा सच

न्यूज तक डेस्क

• 04:44 PM • 14 Jul 2026

सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से नहीं, बल्कि सपा अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल से उनके पेशे पर की गई टिप्पणी के लिए खेद जताया है.

निशिकांत दुबे
निशिकांत दुबे
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव के बीच का 'ट्विटर वॉर' कानूनी मोड़ ले चुका है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक कानूनी नोटिस और जवाब तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से हाथ जोड़कर माफी मांग ली है.

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लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव के सामने सरेंडर कर दिया है? UP Tak की पड़ताल में इस वायरल दावे के पीछे की असल सच्चाई कुछ और ही निकलकर सामने आई है.

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब राम मंदिर के लिए जमीन खरीद के कथित घोटाले से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट को शेयर करते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा था. उन्होंने लिखा था, "टिन्नू टीपू से ही तो बात करता है."

इस टिप्पणी पर अखिलेश यादव और उनके समर्थकों ने कड़ा ऐतराज जताया. समाजवादी पार्टी की ओर से इसे अखिलेश यादव की मानहानि बताते हुए कानूनी नोटिस भेजने की चेतावनी दी गई. सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई और सपा समर्थकों ने पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराईं.

किससे मांगी माफी?

बीते दिनों एक कानूनी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसे दिखाकर समाजवादी पार्टी के समर्थक यह दावा करने लगे कि निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से माफी मांग ली है. असलियत यह है कि निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है.

दरअसल, समाजवादी पार्टी की अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल (जो कि एक रजिस्टर्ड एडवोकेट हैं) ने निशिकांत दुबे को एक मानहानि का नोटिस भेजा था. यह नोटिस इसलिए भेजा गया था क्योंकि निशिकांत दुबे ने कृष्ण कन्हैया पाल को लेकर सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत और उनके प्रोफेशन को ठेस पहुंचाने वाली कुछ टिप्पणियां की थीं.

कृष्ण कन्हैया पाल ने अपने वकील शशांक बसीन के जरिए निशिकांत दुबे को मानहानि का नोटिस भिजवाया था. वायरल हो रहा पत्र इसी नोटिस का जवाब है, जो निशिकांत दुबे के वकील ऋषि कुमार अवस्थी ने कृष्ण कन्हैया पाल के वकील शशांक बसीन को भेजा है.

इस पत्र के पैरा नंबर 9 में लिखा है:

"बिना किसी पूर्वाग्रह के और केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने और सार्वजनिक विमर्श की गरिमा बनाए रखने के लिए, मेरे मुवक्किल (निशिकांत दुबे) अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं यदि उनके द्वारा दिया गया कोई बयान अनजाने में आपके मुवक्किल (कृष्ण कन्हैया पाल) को अपमानजनक लगा हो या उससे उन्हें ठेस पहुंची हो. मेरे मुवक्किल का आपके मुवक्किल की प्रतिष्ठा, गरिमा या पेशेवर स्थिति को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था."

 

 

साफ है कि यह माफीनामा अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल के आत्मसम्मान और उनके प्रोफेशन को लेकर की गई टिप्पणी पर है, न कि अखिलेश यादव से सीधे तौर पर मांगी गई कोई माफी.

निशिकांत दुबे का पलटवार

जैसे ही सपा समर्थकों ने इस पत्र को 'अखिलेश यादव से माफी' के रूप में पेश किया, निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने लिखा:

"समाजवादी पार्टी को फिर मेरी सलाह है कि चाटुकारिता वाले को समझाइए. पहले तो नोटिस अखिलेश जी को देना था मानहानि का, बदले में पाल ने दिया. मैंने पूछा पाल आप कौन होते हो? तो पाल ने दूसरे वकील से नोटिस भेजा. अब नई कहानी! मैंने अखिलेश यादव जी से कोई माफी नहीं मांगी है. गंगा किनारे का रहने वाला हूं, मर्दानगी और मर्यादा से लड़ता हूं. समाजवादी विचारधारा सिर्फ अफवाहों के लिए बनी है."

कृष्ण कन्हैया पाल ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर सपा के वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण कन्हैया पाल ने यूपी तक से बात करते हुए कहा कि निशिकांत दुबे ने उनके पेशे पर उंगली उठाकर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई थी, जिसके बाद उन्होंने कानूनी नोटिस भेजा था. निशिकांत दुबे के वकील ने अब लिखित में उनके पेशे का सम्मान करते हुए खेद व्यक्त किया है.

कृष्ण कन्हैया पाल ने निशिकांत दुबे द्वारा बार-बार उन्हें 'पाल' कहकर संबोधित करने पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा:

"देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी पिछड़ी जाति से आते हैं, मैं भी पाल हूं और पिछड़ी जाति से आता हूं और अखिलेश यादव जी भी पिछड़ी जाति से आते हैं. यह लड़ाई केवल मान-सम्मान की नहीं, बल्कि भारतीय संविधान बनाम सामंतवाद की लड़ाई है. संविधान का आर्टिकल 21 हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है. 2027 में होने वाली लड़ाई भी अपमान और सम्मान के बीच की लड़ाई होगी."

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