प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद: केशव प्रसाद मौर्य ने हाथ जोड़कर की प्रार्थना, क्या सुलझेगा संतों और सरकार का संग्राम?

Prayagraj Shankaracharya controversy: प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे विवाद पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने हाथ जोड़कर शंकराचार्य से संगम स्नान करने और विरोध खत्म करने की अपील की. जानिए संतों और सरकार के बीच चल रहे इस संग्राम की पूरी कहानी.

Prayagraj Shankaracharya controversy
शँकराचार्य विवाद के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने दिया बयान

पंकज श्रीवास्तव

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संगम नगरी में जारी 'धर्मयुद्ध' के बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान सामने आया है. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे गतिरोध को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी है. उन्होंने शंकराचार्य से अपना विरोध खत्म कर संगम में स्नान करने की भावुक अपील की है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

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केशव प्रसाद मौर्य ने क्या कहा?

प्रयागराज पहुंचे केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह शंकराचार्य के चरणों में शीश झुकाते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि जो भी विरोध है, उसे समाप्त करें. उन्होंने कहा, 'मेरी हाथ जोड़कर विनती है कि महाराज जी अपना विरोध छोड़कर पवित्र संगम में स्नान करें, इससे समाज में एक अच्छा और अनुकूल संदेश जाएगा.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह खुद मनाने के लिए शंकराचार्य के शिविर जाएंगे, तो उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनका वहां जाने का कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, लेकिन एक भक्त और विनम्र सेवक के नाते वह प्रार्थना जरूर कर रहे हैं.

सीएम वाले बयान पर साधी चुप्पी

पिछले दिनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने केशव प्रसाद मौर्य की तारीफ करते हुए उन्हें 'सबसे समझदार' बताया था और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक की बात कह दी थी. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम ने मर्यादा का परिचय दिया. उन्होंने कहा, 'वह जगतगुरु हैं, बहुत बड़े संत हैं. कौन मुख्यमंत्री होगा और कौन नहीं, यह तय करना मेरी पार्टी का काम है. उनके किसी भी बयान पर टिप्पणी करना मेरी मर्यादा के खिलाफ होगा.' 

क्या है पूरा विवाद?

बता दें कि प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन के रवैये से नाराज हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन उनके शिविर के बाहर हो रहे हुड़दंग को रोकने में नाकाम रहा है और अधिकारी उनकी बातों को अनसुना कर रहे हैं. इसी नाराजगी के चलते वह शिविर के बाहर धुनी लगाकर बैठे हैं.

राजनीतिक जानकार केशव प्रसाद मौर्य के इस बयान को एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं. चर्चा है कि क्या केशव प्रसाद इस विवाद को सुलझाने के लिए 'संदेशवाहक' की भूमिका निभाएंगे या फिर यह गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पाले में ही रहेगी.

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