शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बाेले ओपी राजभर, कहा- 'वीआईपी कल्चर' छोड़कर पूजा-पाठ करें, सरकार से टकराने में क्या फायदा?

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच ठनी रार अब सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई है. यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शंकराचार्य को दोटूक नसीहत देते हुए उन्हें 'वीआईपी कल्चर' का मोह छोड़ने और नियम-कायदों का पालन करने की सलाह दी है.

OP Rajbhar on Shankaracharya
OP Rajbhar on Shankaracharya
social share
google news

प्रयागराज के संगम तट पर मौनी अमावस्या से शुरू हुआ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पुलिस प्रशासन का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां एक ओर शंकराचार्य और उनके भक्त इसे संतों का अपमान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इस पर बवाली बयान दिया है. राजभर ने शंकराचार्य को नसीहत देते हुए कहा कि संविधान और कानून से देश चलता है, किसी को भी इसे हाथ में लेने की इजाजत नहीं है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 'कालनेमी' वाले बयान का बचाव करते हुए शंकराचार्य की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.

बिना परमिशन कहीं भी घुसना गलत है

सुल्तानपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए ओपी राजभर ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य उसी कल्चर की मांग कर रहे हैं. राजभर ने कहा, "अगर आप बिना अनुमति के कहीं भी घुसेंगे और कोई अप्रिय घटना हो गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? तब लोग सरकार पर उंगली उठाएंगे कि सुरक्षा नहीं दे पाई. इसलिए नियम का पालन जरूरी है."

सीएम योगी के 'कालनेमी' बयान का किया समर्थन

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कुछ लोगों की तुलना 'कालनेमी' से की थी. इस पर राजभर ने कहा कि हनुमान जी जब संजीवनी लाने जा रहे थे तब कालनेमी ने बाधा डाली थी. ठीक वैसे ही जब श्रद्धालु संगम पर आस्था के साथ स्नान करने आ रहे हैं तो शंकराचार्य वहां बाधा बन रहे हैं. राजभर ने कहा कि उन्हें विवाद छोड़कर शांति से स्नान करना चाहिए और मंदिर में जाकर पूजा पाठ करना चाहिए. सरकार से टकराने से क्या फायदा.

यह भी पढ़ें...

क्या है पूरा विवाद?

इस बवाल की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई थी. आरोप है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी पर सवार होकर संगम जा रहे थे तभी पुलिस ने भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें पैदल जाने को कहा. इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई. भक्तों का आरोप है कि पुलिस ने बटुकों की चोटियां खींचकर उन्हें मारा. विवाद सातवें दिन तब और बढ़ गया जब शनिवार शाम कुछ युवकों ने लाठी डंडों के साथ शंकराचार्य के शिविर में घुस गए और 'आई लव बुलडोजर बाबा' के नारे लगाए.

यह भी पढ़ें: सच हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भविष्यवाणी? उपद्रवियों के शिविर में घुसने से पहले कैमरे पर कह दी थी ये बात

    follow on google news