Ram Mandir Dan Vivad: कौन हैं ट्रस्टी कृष्ण मोहन, जिनकी शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई नामजद FIR? शुरू हो गए एक्शन

Ram Mandir Dan Controversy: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा और गहनों की कथित चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है. ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है. जानिए कृष्ण मोहन कौन हैं, उनका प्रशासनिक और सामाजिक सफर क्या रहा, किन लोगों पर कार्रवाई हुई, विवाद क्यों बढ़ रहा है और विपक्ष इस पूरे मामले पर क्या सवाल उठा रहा है.

Ram Mandir Donation Controversy
Ram Mandir Donation Controversy

मयंक शुक्ला

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अयोध्या के राम मंदिर से सामने आए चढ़ावे और गहनों की कथित चोरी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. यह मामला धार्मिक आस्थाओं के साथ-साथ अब सियासी मुद्दा भी बनता जा रहा है. इसी बीच मामले की जांच के लिए गठित SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 नामजद लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर यह केस दर्ज हुआ. अब इस पूरे मामले के बीच अब एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन हैं कृष्ण मोहन, जिनकी शिकायत के बाद इस पूरे मामले का भेद खुल रहा है. विस्तार से जानिए पूरी बात.

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इन 8 लोगों पर हुई कार्रवाई

इस मामले में जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है, उनमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, सुभाष चंद्र, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा शामिल है. साथ ही कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. इन सभी नामों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का है, जो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी है. साथ ही इन लोगों की भूमिका भी सामने आई है कि आखिर किसकी क्या जिम्मेदारी थी.(पढ़ें पूरी खबर)

कौन हैं ट्रस्टी कृष्ण मोहन?

कृष्ण मोहन वहीं ट्रस्टी है, जिनके शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज हुआ था. मिली जानकारी के मुताबिक कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर 2025 में कृष्ण मोहन को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया था. कृष्ण मोहन हरदोई के रहने वाले हैं और उन्होंने 70 के दशक में लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने एटॉमिक एनर्जी विभाग में कुछ साल काम किया और फिर उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ, जहां उन्होंने महाराष्ट्र में काम किया. 2012 में रिटायर होने के बाद के वे समाज सेवा में जुट गए और फिर जाकर उन्हें मंदिर ट्रस्ट में जगह मिली.

केस दर्ज होने के बाद भी क्यों हो रहा विवाद?

केस दर्ज होने के बाद भी इस मामले में विवाद हो रहा है. दरअसल कहा जा रहा है कि जिन 8 लोगों के नाम पर केस दर्ज है, वे सभी निचले स्तर के कर्मचारी है. लेकिन ट्रस्ट के बड़े नामों जैसे महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम नहीं है. हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया है.

वहीं विपक्ष भी इस पर सवाल उठा रहा है. समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव ने कहा है कि छोटे-छोटे कर्मचारियों को फंसाकर बड़े लोगों को बचाया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि SIT की रिपोर्ट पहले से तय करने बनाई गई लगती है. वहीं आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि, मैंने खुद SIT को जमीन घोटाले से जुड़े दस्तावेज दिए थे, जिनमें चंपत राय और कुछ बड़े लोगों का नाम आना तय था. लेकिन ध्यान भटकाने के लिए छोटे कर्मचारियों पर केस कर दिया गया.

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