वृंदावन के प्रसिद्ध कथावचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत का मामला अब धीरे-धीरे उलझता हुआ नजर आ रहा है. प्रथम दृष्टया तो पुलिस इसे आत्महत्या का मामला समझ मामले की जांच कर रही है, लेकिन इसी बीच रसिक दुलारी के परिजनों के दावों और सवालों ने अलग ही चर्चा शुरू कर दी. परिजन इस मौत को आत्महत्या नहीं मान रहे है और साथ ही साजिश की आशंका जता रहे है. रसिक दुलारी के परिजनों का साफ कहना है कि उन्हें मौत की जानकारी मिलने के बाद भी काफी देर इधर-उधर भटकना पड़ा और आश्रम से भी सवालों के जवाब तक नहीं मिले. अब परिजन ने इस मामले में CBI जांच की भी मांग की है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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जीजा सोनू ने किया बड़ा दावा
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण का असल नाम दीपक लोधी हैं. वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और साल 2024 से वृंदावन में रह रहे थे. दीपक की मौत के बाद अब उनके जीजा सोनू पटेल ने बताया कि, जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली थी उसके बाद से उनसे मिलना मुश्किल हो गया था. परिजनों ने तो यह तक दावा किया है कि कई बार वे आश्रम पहुंचकर उनसे मिलने की कोशिश करते थे, तब उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता था. अब दीपक की मौत के बाद परिवार उन सारी बातों को याद कर रहा है और साथ ही सवाल भी उठा रहा है.
रात में पहुंचे आश्रम, सवेरे तक नहीं मिला कोई जवाब
परिजनों के मुताबिक, उन्हें घटना की जानकारी एक फोन के माध्यम से मिली थी, कि दीपक गिर गए है और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. जानकारी मिलते ही परिजन आनन-फानन में वृंदावन के लिए निकल गए. परिजनों ने बताया कि वो रात 3 बजे ही पहुंच गए और सीधा आश्रम गए. लेकिन वहां दीपक के बारे में पूछने पर कुछ पता नहीं सटीक जानकारी नहीं मिली और बाहर इंतजार करने के लिए कहा गया. सुबह 8 बजे तक जब कोई जानकारी नहीं मिली तो वे लोग वहां से निकल गए. परिजनों ने इस पूरी घटनाक्रम को बताते हुए सवाल उठाया है कि घटना के बाद भी परिवार को जानकारी देने और उन्हें स्थिति समझाने में इतना समय क्यों लिया गया. हालांकि, अभी तक आश्रम के पक्ष से इस पर कोई जवाब नहीं आया है.
'तीन दिन तक आश्रम के चक्कर लगाते रहे, लेकिन...'
परिजनों के मुताबिक साल 2024 से ही दीपक वृंदावन में रहते थे. इस दौरान परिवार के लोग जब बीच-बीच में उनसे मिलने आते थे तो कोई समस्या नहीं होती थी. लेकिन जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली, तब से स्थिति बदल गई और उसके बाद दीपक से मिलने नहीं दिया जाता था. कभी एक घंटा तो कभी दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता था. उन्होंने आगे बताया कि, एक बार वे तीन दिन तक आश्रम के चक्कर लगाते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. परिजनों ने यह भी कहा है कि, दीपक की मौत के बाद उन्हें उम्मीद थी कि आश्रम से कोई आकर जानकारी देगा. लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ. हालांकि इसे लेकर भी आश्रम की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
'दीपक आत्महत्या नहीं कर सकते'
दीपक की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है. उनके परिजनों को यह विश्वास नहीं हो पा रहा है कि दीपक अब उनके बीच नहीं रहे. जबलपुर से दीपक के एक परिजन लकी पटेल ने कहा है कि, 'दीपक आत्महत्या नहीं कर सकते. कुछ तो साजिश हुई है. वहां हजार लोग हैं, इसकी उच्च जांच होनी चाहिए. बाबा जी को कोई जानकारी नहीं है, पूरा सिस्टम हाईजैक है.' इसके अलावा परिजनों में आश्रम में हुए एक दूसरी कथित घटना का भी जिक्र किया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
वहीं दूसरे परिजन बृजेश कुमार पटेल ने कहा कि, जब हम आश्रम पहुंचे तो वहां के चक्कर काटते रहे. वहां कोई कुछ बता नहीं रहा था. पोस्टमार्टम के लिए पुलिस ले गई, तब आश्रम के लोग आए. पुलिस ने कहा कि जांच के बाद ही बता पाएंगे.
दीपक के बाबा का दावा- 'उसके साथ गलत हुआ है'
इस मामले में दीपेक के बाबा प्रेम लाल पटेल लोधी ने कहा है कि, दीपक पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार था. पूजा-पाठ में भी जुड़ा था. उसने शादी करने से मना किया था और कहा था कि छोटे वाले की शादी कर दो. उसके साथ गलत हुआ है. दो-चार लोग मिलकर गलत किए हैं. CBI की जांच होनी चाहिए.'
जांच की मांग और परिवार का इंतजार
फिलहाल दीपक लोधी की मौत को लेकर परिजनों ने कई सवाल उठाए हैं और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी. परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है. वहीं परिवार मामले की सटीक कहानी जानने का इंतजार कर रहा है.
(इनपुट- धीरज शाह)
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