आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के पत्र पर तीखा पलटवार किया है. नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने आरोप लगाया कि आलोक कुमार राम मंदिर के चढ़ावा चोरों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और उनके पत्र में साफ तौर पर राजनीति और बेईमानी दिखाई दे रही है.
ADVERTISEMENT
आलोक कुमार के पत्र में 'अपनों' के नाम गायब: संजय सिंह
संजय सिंह ने बताया कि वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या में चंदा चोरी मामले की जांच कर रहे डीएसपी व जांच अधिकारी को एक चिट्ठी लिखकर अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेताओं से पूछताछ की मांग की है.
इस पर पलटवार करते हुए संजय सिंह ने कहा कि आलोक कुमार ने पत्र लिखने में बेईमानी की है. उन्हें विपक्ष के नेताओं के नाम तो याद रहे, लेकिन वे भाजपा, आरएसएस और वीएचपी के उन लोगों का नाम लिखना भूल गए जिन्होंने अपनी आंखों से चोरी देखी है या जो खुद इसके गवाह हैं. उन्होंने इन बड़े चेहरों का जिक्र करते हुए सवाल उठाए-
नृपेंद्र मिश्रा: मंदिर निर्माण का कार्य देख रहे नृपेंद्र मिश्रा ने खुद कई इंटरव्यू में कहा है कि राम मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि डकैती हुई है. पत्र में उनका नाम क्यों नहीं है?
विनय कटियार व अन्य: पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार, मंदिर आंदोलन का चेहरा रहे महंत धर्मदास और ट्रस्ट अध्यक्ष के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने भी वहां चोरी और भ्रष्टाचार की बात कही है, लेकिन इनके नाम गायब हैं.
महिपाल सिंह: वीएचपी और आरएसएस से जुड़े महिपाल सिंह ने जब साल 2020-21 में चंदा चोरी की शिकायत गोपाल राव और चंपत राय से की, तो चंपत राय ने उल्टा उन्हें ही बाहर निकाल दिया. आलोक कुमार ने उनका नाम भी शामिल नहीं किया.
इंजीनियर दीनानाथ वर्मा: इन्होंने आरोप लगाया था कि अनिल मिश्रा मंदिर बनवाने में 40 फीसद कमीशन खाते थे, लेकिन उनसे भी पूछताछ की मांग नहीं की गई.
"मैं जांच में शामिल होने को तैयार, प्रत्यक्षदर्शियों को भी साथ ले जाऊंगा"
संजय सिंह ने कहा कि वे आलोक कुमार के पत्र का स्वागत करते हैं और जांच में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा, "मैं अयोध्या के जांच अधिकारी (डीएसपी) के बुलाने पर उन सभी लोगों को अपने साथ ले जाऊंगा जो दान में मिले आभूषण और अन्य बहुमूल्य चीजें चोरी होने का दावा कर रहे हैं."
सांसद ने कहा कि वे अपने साथ उन लोगों को ले जाएंगे जिनकी 60 किलो और 200 किलो चांदी चोरी हुई है, प्रभु श्रीराम की पदुकाएं और हार चोरी हुए हैं. साथ ही वे उस पूर्व गृह सचिव को भी ले जाने का प्रयास करेंगे जिनका बयान आया है कि एक किलो सोने से लिखी गई पवित्र राम चरित मानस चोरी हो गई है और अनुरोध के बावजूद उन्हें कोई रसीद नहीं मिली. इसके अलावा चांदी की प्राण-प्रतिष्ठित राम शिलाएं और मॉरीशस से आई बहुमूल्य शिला की चोरी का दावा करने वाले संतोष दुबे को भी साथ ले जाने की बात उन्होंने कही.
5 साल अनजान बने रहे आलोक कुमार
संजय सिंह ने कमल के निशान वाला पत्र दिखाते हुए बड़ा खुलासा किया कि 9 और 12 जून को भाजपा के ही नेता और पूर्व मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विवरण के साथ पत्र लिखकर इस पूरे चंदा चोरी प्रकरण की ईडी और सीबीआई से जांच कराने तथा विशेष ऑडिट कराने की मांग की थी.
इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए जब पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने अयोध्या के जिलाधिकारी से जानकारी मांगी, तो एडीएम इंद्रकांत द्विवेदी के माध्यम से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह कहते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया कि वर्तमान में एसआईटी (SIT) जांच चल रही है और इस स्तर पर सूचना देना संभव नहीं है. संजय सिंह ने पूछा कि क्या आलोक कुमार इस बात से भी अनजान हैं कि ट्रस्ट ने सीधे पीएमओ को जानकारी देने से मना कर दिया? उन्होंने कहा कि साल 2021 में ही उन्होंने अयोध्या कोतवाली में जमीन खरीद घोटाले की तहरीर दी थी, लेकिन 5 साल तक आलोक कुमार अनजान बने रहे.
जांच अधिकारी को पत्र लिखेंगे संजय सिंह
संजय सिंह ने ऐलान किया कि वे सोमवार को जांच अधिकारी को एक पत्र लिखेंगे. इस पत्र में वे मांग करेंगे कि चार साल तक ट्रस्ट के सदस्य के रूप में केंद्र सरकार और पीएम मोदी के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से पूछताछ होनी चाहिए, क्योंकि सारी खरीद-फरोख्त उनकी जानकारी में हुई थी. इसके अलावा वे अपनी चिट्ठी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उन सभी लोगों के नाम लिखेंगे जिन्हें आलोक कुमार भूल गए हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चंपत राय ने केवल महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, ट्रस्ट से नहीं. साथ ही यह जानकारी भी सामने आ रही है कि चंपत राय ने आनन-फानन में 'राम फकीर मंदिर' को पूरा तुड़वा दिया है, जिसकी वे गहनता से जानकारी जुटा रहे हैं.
जमीन खरीद के आंकड़ों का दोबारा किया खुलासा
संजय सिंह ने बताया कि वे एसआईटी को 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंप चुके हैं और जल्द ही कुछ नए दस्तावेजों का खुलासा करेंगे. उन्होंने पूर्व में हुए जमीन घोटालों के आंकड़े दोबारा दोहराए-
- 2 करोड़ रुपए की जमीन महज 5 मिनट में 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी गई (जिसमें सुल्तान अंसारी, रवि मोहन तिवारी, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय शामिल थे).
- 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में और नजूल की जमीन 24 करोड़ में खरीदी गई.
- 92 लाख की जमीन को 5 करोड़ 60 लाख में खरीदा गया.
- ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण से 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में और जो जमीन उन्हें मुफ्त मिली थी, उसे 1 करोड़ में खरीदा गया.
संजय सिंह ने अंत में कहा कि 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' वाली धमकी और पत्र लिखकर बंदर घुड़की देने का प्रयास आम आदमी पार्टी के साथ बिल्कुल नहीं चलेगा.
ADVERTISEMENT


