बदायूं के HPCL एथेनॉल प्लांट के GM सुधीर गुप्ता का मर्डर! 31 मार्च को होना था रिटायरमेंट, सामने आ रही सिस्टम की बड़ी खामी

बदायूं के HPCL प्लांट में सुरक्षा की गुहार लगाने के बावजूद पुलिस की लापरवाही के चलते जनरल मैनेजर और एजीएम की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. जिस आरोपी के खिलाफ महीनों से धमकियों की शिकायत और FIR दर्ज थी, उसी ने रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले अधिकारियों को गोलियों से भून दिया.

बदायूं
बदायूं

अंकुर चतुर्वेदी

follow google news

क्या किसी को अपनी मौत की तारीख पहले से पता हो सकती है? बदायूं के HPCL एथेनॉल प्लांट के जनरल मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता और एजीएम हर्षित मिश्रा के मामले में यह बात सच साबित होती दिख रही है. यह महज एक मर्डर नहीं है बल्कि सिस्टमैटिक फेलियर है. जिस खौफ से बचने के लिए सुधीर कुमार गुप्ता ने अपनी सुरक्षित नौकरी और 2 साल की सर्विस छोड़कर VRS यानी समय से पहले रिटायरमेंट ले ली थी उसी खौफ ने उनके रिटायरमेंट से महज 27 दिन पहले उन्हें मौत की नींद सुला दिया.

Read more!

क्या है मुख्य विवाद?

बदायूं में HPCL का एक एथेनॉल प्लांट है. यहां अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू नाम का एक शख्स पिछले कई महीनों से प्लांट के अधिकारियों को परेशान और प्रताड़ित कर रहा था. वह जबरन प्लांट में घुसता था और वहां के बड़े अफसरों को जान से मारने की धमकी देता था.

जनवरी की वो दो बड़ी घटनाएं

13 जनवरी को आरोपी अजय प्रताप एक ठेकेदार की गाड़ी में छिपकर प्लांट के अंदर घुस गया. वह सीधा उस कॉन्फ्रेंस रूम में पहुंचा जहां मीटिंग चल रही थी. वहां उसने शर्ट उठाकर अपने शरीर पर चाकू के निशान दिखाए और अफसरों को डराया कि उसका संबंध नोएडा के बड़े गैंग से है. उसी शाम उसने सड़क पर अफसरों की कार भी रोकी. 

14 जनवरी को अगले ही दिन वह फिर से प्लांट में घुसा और अफसरों को धमकाया. जब अधिकारी शिकायत करने निकले तो उसने 5 किलोमीटर तक उनकी गाड़ी का पीछा किया.

FIR में देरी और सुधीर गुप्ता की बहादुरी

हैरानी की बात यह है कि जनवरी की इन घटनाओं के बाद भी पुलिस ने तुरंत एक्शन नहीं लिया. प्लांट के बाकी अफसर डरे हुए थे तब डिप्टी जनरल मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता खुद आगे आए और उन्होंने इस मामले में पुलिस में शिकायत (FIR) दर्ज कराई. काफी कोशिशों और जिलाधिकारी (DM) के दखल के बाद 4 फरवरी 2026 को मामला दर्ज हुआ.

रिटायरमेंट से ठीक पहले हत्या

दहशत इतनी ज्यादा थी कि सुधीर कुमार गुप्ता ने अपनी 2 साल की नौकरी बची होने के बावजूद VRS यानी समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया था. 31 मार्च उनका आखिरी दिन था. वहीं घटना वाले दिन महाराष्ट्र से आए एक नए अधिकारी लोकेश कुमार अपना चार्ज संभाल रहे थे. तभी आरोपी उसी मीटिंग हॉल में घुसा और सुधीर कुमार गुप्ता और एजीएम हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी.

पुलिस पर सवाल क्यों?

जब 4 फरवरी को FIR दर्ज हो चुकी थी तो आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? अफसरों ने कई बार SHO और DM को पत्र लिखकर अपनी जान का खतरा बताया था फिर भी उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं मिली?

आरोपी महीनों से खुलेआम घूम रहा था और पुलिस इसे सिर्फ 'कागजी कार्रवाई' तक सीमित रखे हुए थी. यह एक ऐसा मामला है जहां अफसरों को पता था कि उनकी जान को खतरा है. उन्होंने पुलिस को नामजद शिकायत भी दी, लेकिन सही समय पर कार्रवाई न होने की वजह से अपराधी के हौसले बढ़ गए और उसने दिन-दहाड़े दो बड़े अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया.

ये भी पढ़ें: ट्रेन के टॉयलेट में खुद ब्लेड से...फलहारी बाबा ने ये बात बोलकर पलट दी आशुतोष ब्रह्मचारी के हमले वाली कहानी, देखें वीडियो

    follow google news