कौन हैं मुल्ला अफरोज, जिन पर लगा था NSA? अब सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत रद्द कर UP सरकार पर लगाया 10 लाख जुर्माना

राजू झा

• 08:41 PM • 29 Sep 2026

Mulla Afroz News: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले के आरोपी मुल्ला अफरोज की प्रिवेंटिव डिटेंशन और एनएसए को रद्द कर दिया है. शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह मामला शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा हुआ है.

मुल्ला अफरोज पर एनएसए हटाने का आदेश
मुल्ला अफरोज पर एनएसए हटाने का आदेश
Google CTA

Mulla Afroz News: उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के कथित मुख्य साजिशकर्ता मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने मुल्ला अफरोज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई को गैरकानूनी और शक्तियों का दुरुपयोग करार देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है.

Read more!

पुलिस कस्टडी का बयान नहीं हो सकता NSA लगाने का आधार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल पुलिस हिरासत में दिए गए आरोपी के कबूलनामे के आधार पर किसी भी नागरिक पर एनएसए जैसा कठोर कानून नहीं लागू किया जा सकता है. अदालत ने कहा कि डिटेनिंग अथॉरिटी को प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश जारी करते समय अन्य स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ तथ्यों का आकलन करना चाहिए था. इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना सोचे-समझे और कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए एनएसए का आदेश तामील किया, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध है.

संभल जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का पूरा घटनाक्रम

यह पूरा मामला संभल स्थित शाही जामा मस्जिद में अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा हुआ है. सर्वे के दौरान नवंबर 2024 में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी. पुलिस ने जांच के सिलसिले में 17 जनवरी 2025 को मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया था. लगभग नौ महीने जेल में बिताने के बाद 9 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी. हालांकि, जेल से रिहाई के ठीक बाद 13 अक्टूबर 2025 को संभल जिला प्रशासन ने उन पर एनएसए लगा दिया. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस एनएसए हिरासत को सही ठहराया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा

शीर्ष अदालत ने मुल्ला अफरोज के वकीलों की उन दलीलों को स्वीकार किया, जिनमें कहा गया था कि बिना किसी नए आपराधिक साक्ष्य के केवल कस्टडी में दिए बयान और आशंका के आधार पर नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मुल्ला अफरोज की प्रिवेंटिव डिटेंशन तुरंत समाप्त कर दी. इसके साथ ही राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाकर यह सख्त संदेश दिया है कि एहतियाती हिरासत की शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

कौन है मुल्ला अफरोज?

मुल्ला अफरोज संभल हिंसा मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति हैं. शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. इसके बाद जिला प्रशासन ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत एहतियाती हिरासत का आदेश जारी किया था. इसी हिरासत को लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

यह भी पढ़ें: नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत, लेकिन इन शर्तों का करना होगा पालन!