ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और यौन शोषण के आरोपों को एक गहरी साजिश करार दिया है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कैमरे के सामने आकर आशुतोष ब्रह्मचारी के दावों और पीड़ित बटुकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुन-चुनकर जवाब दिया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिसके मन में जो खुन्नस थी, वह इस समय बयानों के माध्यम से निकाल रहा है.
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'पूरी कहानी एक झूठा फिक्शन है'
शंकराचार्य ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ जो कहानी पेश की जा रही है, वह पूरी तरह से काल्पनिक और 'फिक्शन' है. उन्होंने घटना के समय और स्थान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय (जून 2024) की घटना बताई जा रही है, उस समय वे वहां उपस्थित ही नहीं थे.
उन्होंने सवाल किया कि जब वे वहां मौजूद ही नहीं थे, तो किसी ने उनसे दीक्षा कैसे ले ली? शंकराचार्य ने इसे भारत के कानून, न्यायपालिका और पुलिस महकमे का बड़ा दुरुपयोग बताया और कहा कि एक हिस्ट्रीशीटर द्वारा बनाई गई कहानी पर सभी लोग 'हाय दैया' करने लग जाते हैं.
'शीश महल' और 'स्विमिंग पूल' की जमीनी हकीकत
आश्रम में 'शीश महल' और 'स्विमिंग पूल' जैसी सुविधाओं के आरोपों पर शंकराचार्य ने तार्किक जवाब दिए. उन्होंने कहा कि किसी कमरे में शीशे लगे होना (पारदर्शी होना) बुराई नहीं बल्कि अच्छाई है, क्योंकि इसका मतलब है कि आश्रम में कुछ भी छिपा हुआ नहीं है और कोई भी कहीं से भी देख सकता है.
वहीं, स्विमिंग पूल के दावे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कोई लग्जरी पूल नहीं, बल्कि उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के स्वास्थ्य के लिए बनाया गया एक व्यायाम का 'हौदा' था. उन्होंने बताया कि गुरुजी के भारी शरीर और घुटनों की तकलीफ के कारण वैद्यों ने उन्हें पानी में व्यायाम की सलाह दी थी ताकि वे गिरें नहीं, और उनके ब्रह्मलीन होने के साथ ही उसे बंद कर दिया गया.
जांच रिपोर्ट और अग्रिम जमानत पर दी सफाई
शंकराचार्य ने पुलिस की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर भी तीखे सवाल खड़े किए. उन्होंने आश्चर्य जताया कि जो रिपोर्ट पुलिस विभाग को देनी चाहिए, उसे एक शिकायतकर्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कैसे सार्वजनिक कर रहा है? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस ने आशुतोष ब्रह्मचारी को अपना परमानेंट प्रवक्ता बना लिया है?
अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक 'मठ' और 'संस्था' हैं, इसलिए संस्था को संरक्षित करने के लिए उनका परिकर वर्ग कानूनी बचाव कर रहा है. उन्होंने जेल में सुरक्षा और पुराने अनुभवों (1966 के आंदोलन) का हवाला देते हुए अपनी जान के खतरे और भक्तों की भावनाओं का जिक्र किया.
अंतरराष्ट्रीय साजिश और 'एपस्टीन फाइल' का कनेक्शन
इंटरव्यू के अंत में शंकराचार्य ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया. उन्होंने कहा कि भारत में उनके खिलाफ इस फर्जी मामले को इसलिए उछाला जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई 'एपस्टीन फाइल' (Epstein File) से जनता का ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने कहा कि एस्टीन फाइल में ऐसी चीजें निकलकर आ गई हैं जिस पर पूरे विश्व में चर्चा हो रही है, लेकिन भारत में शंकराचार्य का मामला झूठा निकाल करके उस बड़ी चर्चा को दबाने का काम किया जा रहा है.
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