शीशमहल और स्विमिंग पूल के आरोपों का क्या है सच? शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद मीडिया को बुलाकर बताया सबकुछ

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आश्रम में 'शीशमहल' और 'स्विमिंग पूल' के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें पारदर्शिता और गुरुजी के स्वास्थ्य लाभ के लिए जरूरी बताया है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

संतोष शर्मा

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों गंभीर आरोपों और विवादों के घेरे में हैं. आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के संगीन आरोपों के बीच अब आश्रम की भव्यता, पांच मंजिला इमारत, शीशमहल और स्विमिंग पूल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे थे. इन चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए खुद शंकराचार्य ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश की है.

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यह तो पारदर्शिता का प्रतीक है

आश्रम को 'शीशमहल' कहे जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि शीशे लगा होना कोई बुराई नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि पारदर्शी शीशे होने का मतलब है कि अंदर कुछ भी छिपा हुआ नहीं है. कोई भी बाहर से अंदर देख सकता है जो आश्रम की शुचिता और पारदर्शिता को दर्शाता है. इसे 'दुर्गुण' के रूप में पेश करना गलत है.

स्विमिंग पूल के पीछे की असली कहानी

आश्रम में स्विमिंग पूल होने के दावों पर शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि यह कोई विलासिता के लिए बनाया गया पूल नहीं है. उन्होंने बताया कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों और वैद्यों ने उन्हें पानी में व्यायाम करने की सलाह दी थी. उनके भारी शरीर और चलने में असमर्थता के कारण एक छोटा 'हौदा' (कुंड) बनवाया गया था ताकि वे गिरें नहीं और सुरक्षित व्यायाम कर सकें. वर्तमान में इसमें केवल रद्दी सामान और अनुपयोगी वस्तुएं भरी हुई हैं.

ग्राउंड रिपोर्ट में क्या मिला?

UP Tak की टीम जब मौके पर पहुंची तो पांच मंजिला आश्रम के दावे भी अलग पाए गए. रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य रूप से यह तीन मंजिला इमारत है. भूतल पर पूजन स्थल, पहली मंजिल पर बटुकों के लिए हॉस्टल, दूसरी मंजिल पर भोजन और रसोई की व्यवस्था है जबकि ऊपरी हिस्से में शंकराचार्य का निवास स्थान है.

विवाद की जड़ और कानूनी स्थिति

यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था. अब यह मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है. पुलिस ने शंकराचार्य और उनके शिष्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. वहीं, शंकराचार्य ने इन आरोपों को एक साजिश करार देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है.

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