उत्तर प्रदेश की सियासत में कुंडा के विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया एक बड़ा नाम हैं. लोग उन्हें बाहुबली कहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजा भैया के पिता और भदरी रियासत के नरेश राजा उदय प्रताप सिंह का रुतबा और उनके किस्से राजा भैया से भी कहीं ज्यादा दिलचस्प और हैरान करने वाले हैं? मुहर्रम के आते ही एक बार फिर राजा उदय प्रताप सिंह चर्चा में हैं और पुलिस प्रशासन ने उन्हें हमेशा की तरह इस बार भी 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर लिया है.
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आखिर मुहर्रम के मौके पर पुलिस राजा भैया के पिता से इतना क्यों डरती है? और क्यों उन्हें हर साल नजरबंद करना पड़ता है? आइए जानते हैं भदरी नरेश की जिंदगी से जुड़े वो अनसुने किस्से, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं.
मुहर्रम का विरोध और हाउस अरेस्ट का इतिहास
राजा उदय प्रताप सिंह का मुहर्रम को लेकर पुराना विवाद है. दरअसल, वह उस गेट के नीचे से नहीं गुजरना चाहते जिस पर मुहर्रम को लेकर कुछ लिखा होता है. उनका साफ कहना होता है कि इस गेट को हटाया जाए. हर साल मुहर्रम के दौरान वह इसका कड़ा विरोध करते हैं, जिसके चलते कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए पुलिस प्रशासन को हर बार उन्हें भदरी कोठी में ही हाउस अरेस्ट करना पड़ता है. एक बार तो वह इस मांग को लेकर धरने पर भी बैठ गए थे.
जब खुद को घोषित कर दिया था 'स्वतंत्र राज्य'
भदरी रियासत के राजा बजरंग बहादुर सिंह (जो हिमाचल प्रदेश के उपराज्यपाल भी रहे) के दत्तक पुत्र उदय प्रताप सिंह की पढ़ाई दून स्कूल और फिर जापान में हुई. बेहद पढ़े-लिखे होने के बावजूद वे घोर हिंदूवादी और विश्व हिंदू परिषद के सदस्य रहे. उनका सबसे हैरान करने वाला किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय का है. जब इंदिरा गांधी ने 'प्रिवी पर्स' (राजा-महाराजाओं को मिलने वाले भत्ते) को खत्म किया, तो इसका पहला विरोध करने वालों में उदय प्रताप सिंह थे. उन्होंने गुस्से में आकर अपनी भदरी रियासत को आजाद भारत में एक 'स्वतंत्र राज्य' घोषित कर दिया था, हालांकि बाद में दबाव के चलते चीजें बदलीं.
न कभी वोट डाला, न बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया
हैरानी की बात यह है कि राजा भैया के पिता लोकतंत्र में बिल्कुल भरोसा नहीं रखते. उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा, कभी वोट नहीं डाला और न ही कभी अपने बेटे राजा भैया के लिए वोट मांगा. खुद राजा भैया ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि उनके और उनके पिता के बीच बहुत ही औपचारिक बातचीत होती है. पिताजी बोलते हैं और वो सिर्फ सुनते हैं.
जब पुलिस ने बरामद की AK-47 तो बोले- 'कट्टा दिखाते तो बेइज्जती हो जाती'
मायावती सरकार के दौरान जब राजा भैया पर पोटा (POTA) लगा और शिकंजा कसा गया, तब उनके पिता उदय प्रताप सिंह भी करीब 2 साल तक जेल में रहे. यूपी पुलिस के रिकॉर्ड में उन पर 20 लोगों के अपराधी गिरोह का सरगना होने का भी मुकदमा दर्ज हुआ था. राजा भैया के मुताबिक, जब पुलिस बल ने उनकी कोठी पर छापेमारी की और एक AK-47 बंदूक बरामद कर दिखाई, तो उनके पिता के मुंह से निकला, "चलो अच्छा हुआ AK-47 दिखाई, अगर कट्टा-वट्टा दिखाते तो बड़ी बेइज्जती हो जाती." वे एक नेशनल शूटर रहे हैं और हथियारों के बेहद शौकीन हैं.
गाड़ियों के धुएं से एलर्जी और 'राजा-प्रजा' दरबार
प्रकृति प्रेमी उदय प्रताप सिंह को गाड़ियों के धुएं और प्रदूषण से इतनी एलर्जी है कि कोठी के अंदर गाड़ियों को स्टार्ट नहीं होने दिया जाता, बल्कि उन्हें धक्का देकर गेट के अंदर ले जाया जाता है. आज भी भदरी रियासत के स्टेशन पर जब लोग आते हैं, तो राजा उदय प्रताप सिंह वहां कुर्सी लगाकर बैठते हैं, सिगार सुलगाते हैं और उनके सेवक आने-जाने वाले लोगों को मुफ्त में चाय, बिस्कुट और पानी देते हैं. यह नजारा बिल्कुल किसी पारंपरिक राजा और प्रजा के मिलन जैसा लगता है.
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