उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. अमेठी जिले की प्रतिष्ठित गौरीगंज विधानसभा सीट इस समय राज्य की सबसे हॉट सीटों में से एक बनी हुई है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के बागी विधायक बीजेपी में अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के पुराने वफादार कार्यकर्ता भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
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बीजेपी में मची होड़
गौरीगंज से लगातार तीन बार विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह 2022 में समाजवादी पार्टी के सिंबल पर जीतकर आए थे. हालांकि, 2023 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने सपा से बगावत कर बीजेपी के पाले में कदम रख दिया. ठाकुर समाज पर मजबूत पकड़ और लगातार जीत का रिकॉर्ड उनकी दावेदारी को सबसे मजबूत बनाता है. हालांकि, उन्होंने अभी तक आधिकारिक तौर पर पार्टी की सदस्यता नहीं ली है, जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.
दूसरी तरफ, 2022 के चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे चंद्र प्रकाश मिश्रा उर्फ 'मटियारी' ने भी अपनी दावेदारी पूरी ताकत से ठोक दी है. गौरीगंज में सबसे अधिक संख्या ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो मटियारी का बड़ा वोट बैंक माना जाता है. मटियारी और उनके समर्थक मानते हैं कि पार्टी में वफादारी का इनाम उन्हें टिकट के रूप में मिलना चाहिए. स्थानीय राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि यदि बीजेपी मटियारी को नजरअंदाज करती है, तो वे दूसरा रास्ता भी अपना सकते हैं. इसके अलावा बीजेपी से विजय किशोर तिवारी और नगर पालिका अध्यक्ष दीपक सिंह भी अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.
सपा और कांग्रेस खेमे में भी दावेदारों की लंबी कतार
राकेश प्रताप सिंह के सपा से किनारा करने के बाद समाजवादी पार्टी में दावेदारों की होड़ मच गई है.
- मोनू सिंह की एंट्री: सुल्तानपुर की इसौली सीट से चुनाव लड़ चुके बाहुबली मोनू सिंह ने गौरीगंज से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि अखिलेश यादव का निर्देश मिलते ही वे पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेंगे.
- अन्य सपा दावेदार: सपा खेमे से प्रियांक सिंह हरविजय, सिंधुजीत सिंह 'सिंधु' और राय उदित यादव जैसे नेता भी टिकट की रेस में शामिल हैं.
- कांग्रेस की नजर: इंडिया गठबंधन के तहत पूर्व एमएलसी दीपक सिंह भी इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं.
बीएसपी खेल सकती है 'ब्राह्मण कार्ड'
बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी गौरीगंज में सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला आजमाने की तैयारी में है. चर्चा है कि बसपा इस बार किसी मजबूत ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगा सकती है. पिछली बार बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ चुकीं सत्यकांत तिवारी की पत्नी के बाद, इस बार खुद सत्यकांत तिवारी के मैदान में उतरने की चर्चाएं जोरों पर हैं.
गौरीगंज सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ जहां बीजेपी के सामने अपने नए साथी और पुराने कार्यकर्ताओं को साधने की चुनौती है, वहीं सपा और बीएसपी भी जातीय समीकरणों के जरिए कब्जा जमाने की फिराक में हैं.
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