मैं अपना कोई भी काम नहीं कर पा रहा हूं. डॉक्टरों ने मुझे किसी अच्छे अस्पताल में इलाज करने की सलाह दी है. इसलिए मुझे 6 मार्च से 13 मार्च तक की छुट्टे दे दें.... बलिया में SDM आलोक प्रताप सिंह को उनके ही पालतू कुत्ते ने काट लिया. जिसकी वजह से उन्होंने DM से 8 दिन की छुट्टी मांगी, लेकिन इस बीच काम के दवाब की वजह से उनका तब्दला ही कर दिया गया.
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चटकारे लेकर पढ़ी जा रही है. मामला एक उप-जिलाधिकारी (SDM) साहब, उनके पालतू कुत्ते और एक वायरल चिट्ठी से जुड़ा है. अमूमन अधिकारी काम के दबाव या बीमारी की वजह से छुट्टी मांगते हैं लेकिन यहां तो डॉग बाइट ने साहब को कुर्सी से ही दूर कर दिया.
क्या है पूरा वाकया?
घटना बलिया जिले की बैरिया तहसील की है. यहां तैनात SDM आलोक प्रताप सिंह 5 मार्च को अपने सरकारी आवास पर थे. उनके साथ उनके बुजुर्ग पिता भी वहीं मौजूद थे. साहब के पास एक अमेरिकन बुली नस्ल का कुत्ता है, जो उस वक्त थोड़ा आक्रामक हो रहा था और उनके पिता को परेशान कर रहा था.
आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से कुत्ते को सहलाने के लिए कहा था ताकि वह शांत हो जाए. लेकिन जब पिता ने ऐसा नहीं किया तो साहब खुद बीच-बचाव करने पहुंच गए. बस फिर क्या था वफादार कहे जाने वाले पालतू कुत्ते ने अपने ही मालिक पर हमला कर दिया और उनके दोनों हाथों को बुरी तरह काट लिया.
हाथों में जख्म, दिल में दर्द और वायरल लेटर
कुत्ते के हमले में SDM साहब के हाथों से काफी खून बहा. स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार तो हुआ लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि साहब को बेहतर इलाज (हायर सेंटर) के लिए छुट्टी की दरकार पड़ी. उन्होंने जिलाधिकारी (DM) को एक पत्र लिखा जिसमें इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए मेडिकल लीव मांगी.
हैरानी की बात यह है कि साहब का यह निजी पत्र देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. आलोक प्रताप सिंह का कहना है कि कुत्ते ने उन्हें इतनी बुरी तरह काटा है कि वह पेन पकड़कर हस्ताक्षर करने की स्थिति में भी नहीं हैं.
छुट्टी तो मिली पर साथ में 'तबादला' भी
इस पूरी कहानी में ट्विस्ट तब आया जब जिलाधिकारी ने उनकी छुट्टी तो मंजूर कर ली लेकिन प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए उनकी जगह दूसरे उप-जिलाधिकारी की तैनाती कर दी. अब गलियारों में चर्चा है कि साहब इलाज कराने गए थे, लेकिन पीछे से उनकी कुर्सी पर कोई और बैठ गया.
फिलहाल आलोक प्रताप सिंह मेडिकल लीव पर अपने घर हैं. उनका कहना है कि पत्र में लिखी हर बात सच है, लेकिन वह इस बात से हैरान हैं कि उनका यह लेटर वायरल कैसे हुआ. खैर, बैरिया की ये 'डॉग स्टोरी' अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है.
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