आगामी साल 2027 में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है. इसे लेकर अभी से ही पार्टियां अपनी तैयारियों में जुट गई है. इसी बीच पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां राजा वड़िंग ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है. अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस में संगठन स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी की चर्चा है. जानकारी के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को जल्द ही पद से हटाकर संगठन में बदलाव किया जा सकता है. इसके साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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अजय राय के बाद कौन?
जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी ने अजय राय के साथ एक दिन पहले वन-टू-वन बैठक की थी. इसमें उन्हें संभावित फैसले की जानकारी दिए जाने की बात कही गई है. इसके बाद प्रदेश कांग्रेस में नए अध्यक्ष को लेकर अराधना मिश्रा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. अराधना मिश्रा कांग्रेस विधायक दल की नेता और रामपुर खास से विधायक हैं. सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही आराधना मिश्रा के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है.
तीन कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जाने की चर्चा
प्रदेश अध्यक्ष के साथ कांग्रेस संगठन में तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की भी संभावना जताई गई है. इन तीन पदों के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की जा सकती है. इनपुट के मुताबिक कार्यकारी अध्यक्षों में मुस्लिम, दलित और ओबीसी प्रतिनिधित्व का फॉर्मूला रखा जा सकता है. इस संभावित टीम के जरिए कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग में मुस्लिम, दलित, ओबीसी और सवर्ण वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की बात कही गई है.
इन नेताओं के नाम कार्यकारी अध्यक्ष की दौड़ में
कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के कई नेताओं के नाम चर्चा में बताए गए हैं. इनमें देवेंद्र निषाद, दानिश अली, सुशील पासी, सांसद तनुज पुनिया और सांसद राकेश राठौर शामिल हैं. संभावित संगठन में प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ प्रदेश अध्यक्ष और तीन कार्यकारी अध्यक्षों की टीम के जरिए अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जा सकता है.
कौन हैं अराधना मिश्रा?
अराधना मिश्रा, जिन्हें मोना के नाम से भी जाना जाता है, रामपुर खास से कांग्रेस विधायक और पार्टी की विधायक दल की नेता हैं. वह तीन बार विधायक रह चुकी हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं. इसके अलावा वह वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. प्रमोद तिवारी रामपुर खास से नौ बार विधायक रह चुके हैं और बाद में राज्यसभा सदस्य बने. साथ ही तिवारी परिवार का प्रतापगढ़ की इस विधानसभा सीट पर लगातार 47 वर्षों से प्रभाव रहा है.
अराधना मिश्रा को प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी नेताओं में बताया गया है. जानकारी के अनुसार, उन्होंने प्रियंका गांधी के 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान में उनके साथ व्यापक स्तर पर काम किया था.
ब्राह्मण चेहरे को आगे करने की रणनीति की चर्चा
दरअसल, आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई है और इसी वजह से प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर ब्राह्मण चेहरे को आगे करने पर विचार किया जा रहा है. वहीं राजेंद्र पाल गौतम के प्रदेश प्रभारी के तौर पर होने और अराधना मिश्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने की स्थिति में कांग्रेस की संभावित टीम में दलित और ब्राह्मण प्रतिनिधित्व का समीकरण बन सकता है. इससे पार्टी को ब्राह्मण-दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है.
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