उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच 'इंडिया गठबंधन' (INDIA Alliance) तो तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर घमासान शुरू हो गया है. कांग्रेस ने गठबंधन के तहत 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी जताई है, जबकि समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 85 से 90 सीटें ही देने के मूड में है.
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कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार, सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला अक्टूबर तक होने की उम्मीद है. वहीं सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का कहना है कि अगर समय रहते सीट बंटवारा नहीं हुआ, तो 2027 का चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा.
पेच कहां फंस रहा है? (नंबर और सीटों का चयन)
मामला केवल सीटों की संख्या का नहीं है, बल्कि सीटों के चयन (Selection) को लेकर भी रस्साकशी जारी है:
- मुस्लिम बहुल सीटें: कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों की मांग कर रही है, लेकिन सपा इन सीटों को छोड़ने के मूड में नहीं है.
- 2024 के लोकसभा प्रदर्शन का आधार: कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के चुनाव में जिन 6 लोकसभा सीटों पर उसने जीत दर्ज की थी, उन संसदीय क्षेत्रों की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर उसकी दावेदारी बनती है.
इन 5 प्रमुख जिलों में अटका गठबंधन का समीकरण
सहारनपुर: जिले की 7 विधानसभा सीटों में से सांसद इमरान मसूद 5 सीटें कांग्रेस के लिए चाहते हैं, जिनमें से 2 पर वर्तमान में सपा के विधायक हैं.
- रायबरेली: जिले में 6 विधानसभा सीटें हैं. सपा ऊंचाहार, हरचंदपुर और सरेनी जैसी मजबूत सीटें अपने पास रखना चाहती है.
- अमेठी: अमेठी की 4 सीटों में से सपा गौरीगंज और तिलोई जैसी अहम सीटों पर अपना दावा नहीं छोड़ना चाहती.
- बाराबंकी: सांसद तनुज पूनिया जिले की 6 में से कम से कम 3 सीटें कांग्रेस के खाते में चाहते हैं, जबकि सपा सभी सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है.
- सीतापुर: जिले की 9 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 4-5 सीटें मांग रही है, जबकि सपा केवल 1-2 सीटें ही देने को तैयार है.
अब सभी की निगाहें अक्टूबर में होने वाली 'इंडिया गठबंधन' की अगली बैठकों पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि दोनों दल किस सम्मानजनक फॉर्मूले पर सहमत होते हैं.
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