UP Election 2027: सपा-कांग्रेस में सीट बांटने का नया फॉर्मूला तैयार, अखिलेश यादव ने बनाया 'जीत की गारंटी' वाला ये गुप्त प्लान

यूपी चुनाव 2027 के लिए सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो गया है. टिकट केवल 'जीत की गारंटी' और जातीय समीकरण के आधार पर मिलेगा. भितरघात रोकने के लिए सपा चुनाव से पहले ही उम्मीदवार घोषित करेगी. अखिलेश यादव खुद 200 सीटों पर उम्मीदवारों की खुफिया जांच और फीडबैक ले रहे हैं.

rahul gandhi akhilesh yadav
rahul gandhi akhilesh yadav

समर्थ श्रीवास्तव

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी कमर कस ली है. भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन का खाका तैयार हो चुका है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार सीटों का बंटवारा किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ 'जीत की गारंटी' के आधार पर होगा. सपा ने साफ कर दिया है कि गठबंधन में सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं बांटा जाएगा बल्कि उम्मीदवार की जमीनी पकड़ देखी जाएगी.

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कागजों पर परखी जाएगी कांग्रेस की मजबूती

सीटों के बंटवारे को लेकर सपा ने एक बेहद सख्त और वैज्ञानिक तरीका अपनाया है. जब कांग्रेस के साथ औपचारिक बातचीत शुरू होगी तो सबसे पहले कांग्रेस से उनकी पसंद के जिलों की लिस्ट मांगी जाएगी. इसके बाद कांग्रेस को यह साबित करना होगा कि संबंधित सीट पर उनका उम्मीदवार भाजपा को हराने में सक्षम है या नहीं.

सपा नेतृत्व कांग्रेस के दावों को अपने समीकरणों से मिलाएगा. दोनों पार्टियों के संभावित उम्मीदवारों के पुराने वोट शेयर और जातीय ताकत की कागजों पर तुलना की जाएगी. जिसका पलड़ा भारी होगा, वह सीट उसी पार्टी के खाते में जाएगी. सपा का मानना है कि मुख्य लक्ष्य भाजपा को हराना है, इसलिए उम्मीदवार चाहे जिसका हो, वह जिताऊ होना चाहिए.

लोकसभा चुनाव की गलती से लिया सबक

सपा सूत्रों का कहना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर टिकट वितरण में कमियां रह गई थीं, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ. अखिलेश यादव इस बार विधानसभा चुनाव में वह गलती दोहराना नहीं चाहते. यही वजह है कि कांग्रेस को सीटें देने की संख्या अभी तय नहीं की गई है. कांग्रेस को सीटवार आंकड़े देकर अपनी मजबूती साबित करनी होगी.

भितरघात रोकने के लिए 'मास्टरस्ट्रोक'

अखिलेश यादव ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. चुनाव की तारीखों के एलान से बहुत पहले ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी. इसके पीछे दो मुख्य वजहें हैं. पहली यह कि उम्मीदवार को अपने क्षेत्र में तैयारी करने का पूरा समय मिल सके. दूसरी वजह यह है कि आखिरी वक्त पर टिकट कटने से होने वाली नाराजगी और भितरघात को समय रहते शांत किया जा सके.

200 सीटों पर काम पूरा, खुफिया एजेंसियां कर रही हैं जांच

सपा प्रमुख खुद हर एक विधानसभा सीट की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं. जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला अध्यक्षों और नगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को लखनऊ बुलाकर फीडबैक लिया जा रहा है. खबर है कि करीब 200 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की पहचान पूरी हो चुकी है.

जुलाई के पहले हफ्ते से उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. खास बात यह है कि सपा अपने स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की खुफिया जांच भी करा रही है, ताकि जनता के बीच उनकी असली हैसियत और छवि का पता लगाया जा सके.

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