उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रविवार देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 40 IAS अफसरों के तबादले कर दिए. इस फेरबदल में एक महिला अफसर किंजल सिंह की खूब चर्चा हो रही है. किंजल सिंह जो 7 महीने पहले ही परिवहन आयुक्त बनी थी, अब उनका माध्यमिक शिक्षा विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया है. किंजल सिंह के इस ट्रांसफर-पोस्टिंग के पीछे परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से अनबन बताई जा रही है. इस मामले के बाद किंजल सिंह से जुड़ी कई कहानियां सामने आई है कि कैसे संघर्षों का सामना कर वे इस मुकाम तक पहुंची. विस्तार से जानिए IAS अफसर की पूरी कहानी.
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पहले जानिए कौन हैं किंजल सिंह?
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवा में किंजल सिंह एक मशहूर नाम है. किंजल के काम करने के तरीके से ना केवल बदमाश दहशत में रहते है बल्कि उनके बड़े दिल की वजह से भी वह चर्चा में बनी है. यूपी के बलिया में जन्मी किंजल सिंह 2008 बैच की आईएएस अधिकारी है. वे बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और अयोध्य जैसे जिलों में डीएम के पद पर काम कर चुकी है. इसके अलावा वो चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के रूप में भी काम कर चुकी है. लेकिन अब महज 7 महीने में अब उनके ट्रांसफर-पोस्टिंग को साइडलाइन माना जा रहा है, जो कि चर्चा का विषय बना हुआ है.
मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ खराब तालमेल?
किंजल सिंह के ट्रांसफर के बाद ही यह चर्चाएं तेज हो गई कि उनका परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ तालमेल नहीं बैठ पाया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनके और मंत्री के बीच विभागीय कामकाज को लेकर सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा था. 16 सितंबर 2025 को परिवहन आयुक्त बनने के बाद उन्होंने ओवरलोडिंग पर सख्ती बरती और कई अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया. कहा जा रहा कि कुछ फैसलों पर उन्होंने मंत्री से कुछ दिशा-निर्देश भी मिले थे लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया.
पिता की फेक एनकाउंटर में हुई थी हत्या
किंजल की कहानी काफी संघर्षों से भरी हुई है और वे इन्हीं से पार होकर आज एक चर्चित महिला IAS अधिकारी बनी है. किंजल सिंह के पिता का नाम केपी सिंह था जो कि DSP थे. लेकिन किंजल को अपने पिता का प्यार ज्यादा दिन नसीब नहीं हुआ और किंजल के जन्म के 2.5 महीने बाद ही उनकी फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरे परिवार को मां विभा सिंह ने अकेले संभाला.
दरअसल केपी सिंह एक ईमानदार पुलिस वाले थे, लेकिन उनके साथी रिश्वतखोरी और अन्य कुकर्मों में शामिल थे. एक दिन जब केपी सिंह को सारी कहानी पता चल गई तो उनके साथियों के डर के माने पसीने छूट गए. केपी सिंह को रास्ते से हटाने के लिए उन्होंने एक प्लान बनाया और फिर उन्हें आपराधिक मामले में माधवपुर जाने को कहा और वहीं मौका मिलते ही केपी सिंह को गोलियों से भून डाला. आनन-फानन में जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस फर्जी मुठभेड़ में 12 और लोगों की जान गई थी.
कैंसर से हुई मां की मौत
केपी सिंह की हत्या के बाद ही मां विभा सिंह ने अपने दोनों बच्चों को किंजल और प्रांजल के साथ काफी संघर्ष भरा जीवन बिताया. वह न्याय के लिए बार-बार बलिया से दिल्ली सुप्रीम कोर्ट जाया करती थी, जिस दौरान कई बार किंजल भी उनके साथ रहती थी. लेकिन इसी बीच किंजल के सिर पर फिर एक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और साल 2004 में मां विभा की कैंसर से मौत हो गई. मां के अंतिम क्षणों में किंजल ने उनसे वादा किया कि वह आगे चलकर IAS अफसर बनेगी और पिता को न्याय जरूर दिलाएंगी.
2008 में क्रैक किया UPSC
माता-पिता के जाने के बाद दोनों बहनों ने जीं-तोड़ मेहनत करना शुरू कर दिया. उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज से पहले ग्रेजुएशन किया और UPSC की तैयारी शुरू कर दी. साल 2008 में किंजल ने अपने दूसरे प्रयास में 25वीं रैंक हासिल किया और IAS अफसर बन गई. वहीं प्रांजल ने भी परीक्षा में 252वीं रैंक हासिल कर IRS अफसर का पद हासिल किया.
31 साल बाद मिला न्याय
IAS बनने के बाद किंजल ने अपने पिता को न्याय दिलाने की प्रतिज्ञा जारी रखी. उन्होंने सबसे पहले सबूत जुटाया और सभी आरोपियों को गिरफ्तार करवाया. हालांकि यह लड़ाई काफी लंबी चली और 31 साल बाद किंजल के पक्ष में फैसला आया. साल 2013 में कोर्ट ने केपी सिंह की हत्यारों को सजा सुनाई.
50 के करेले 1550 रुपए में खरीदने वाली कहानी
किंजल सिंह से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां भी है. दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एक बार जून के महीने में अपने काफिले के साथ मस्जिद का इंस्पेक्शन पर लौट रही थी. इसी दौरान किंजल की नजर एक महिला पर पड़ी जो सब्जी बेच रही थी. उन्होंने एक किलो करेले का दाम पूछा तो उन्होंने 50 रुपए बताया. फिर किंजल ने एक किलो करेले खरीदा तो लेकिन 50 की जगह 1550 रुपए दिए. इसके अलावा उनकी स्थिति को देखते हुए 5 किलो दाल, 40 किलो चावल, 50 किलो गेहूं और 20 किलो आटा उनके घर पहुंचाने के निर्देश भी दिए जो कि महज आधे घंटे के अंदर उस महिला के घर पहुंच भी गया.
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