UP MLC Election 2026: वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर वरिष्ठ पत्रकारों ने क्या कहा? जानिए क्या है ग्राउंड रिपोर्ट

रोशन जायसवाल

• 12:00 PM • 24 Oct 2026

वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव के मतदान संपन्न हो चुके हैं, जिसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का 'सेमीफाइनल' माना जा रहा है. चुनाव में बेरोजगारी और यूजीसी जैसे मुद्दों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका और बैलेट पेपर के समीकरण नतीजों को बेहद दिलचस्प बनाने वाले हैं.

UP MLC Election
UP MLC Election
Google CTA

वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव के मतदान संपन्न हो चुके हैं और अब सभी की निगाहें चुनाव नतीजों पर टिकी हुई हैं. उत्तर प्रदेश की सियासत में इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का 'सेमीफाइनल' और एक बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है. यूपी तक की खास रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में स्थानीय चाय की दुकानों और जिला मुख्यालय पर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर इस बार हवा का रुख किस तरफ है.

Read more!

वोटिंग प्रतिशत और कड़ा मुकाबला

इस बार वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक दोनों ही सीटों पर समाजवादी पार्टी का पहले से कब्जा रहा है, जिनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने और अनुभवी चेहरों पर दांव खेला है.

  • स्नातक एमएलसी चुनाव: मतदान प्रतिशत 33.04% दर्ज किया गया.
  • शिक्षक एमएलसी चुनाव: मतदान प्रतिशत 66.72% रहा.

बीजेपी की तरफ से स्नातक सीट के लिए केदारनाथ सिंह और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए प्रमोद मिश्रा मैदान में हैं, जो कि अनुभवी और मझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं. वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ से आशुतोष सिन्हा एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खुद वाराणसी पहुंचकर बीजेपी उम्मीदवारों के समर्थन में जनसभा की थी और ताबड़तोड़ प्रचार किया था.

पत्रकारों की राय: सत्ता विरोधी लहर और युवाओं का रुख

वरिष्ठ पत्रकारों के साथ चर्चा में ग्राउंड की कई अहम परतें खुलकर सामने आईं:

यूजीसी, नीट और बेरोजगारी के मुद्दे: वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इस चुनाव में सिर्फ स्थानीय समीकरण ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर के मुद्दे भी हावी रहे हैं. हाल ही के दिनों में यूजीसी (UGC), नीट (NEET) और पेपर लीक/बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं और सवर्ण समाज के एक वर्ग में सरकार के प्रति नाराजगी देखी गई है, जिसका असर बैलेट पेपर पर पड़े वोटों में देखने को मिल सकता है.

निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका: चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों (जैसे पंकज सिंह डब्ल्यू राय आदि) की मौजूदगी ने समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है. पत्रकारों के मुताबिक, निर्दलीय प्रत्याशी कई जगहों पर बीजेपी के वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं, जिससे सीधा फायदा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को मिलता हुआ नजर आ रहा है.

बैलेट पेपर और वरीयता (Preference) का खेल: यह चुनाव ईवीएम से नहीं बल्कि बैलेट पेपर से हुआ है, जहां मतदाता 1, 2, 3, 4 तक अपनी वरियता तय करते हैं. वोटों की गिनती (एलिमिनेशन प्रोसेस) ही असली तस्वीर साफ करेगी कि बाजी किसके हाथ लगेगी.

क्या वाराणसी के ये नतीजे आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की दिशा तय करेंगे? यह तो आने वाले परिणाम ही बताएंगे, लेकिन फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज है.

ये भी पढ़ें: आगरा में सपा एमएलसी प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल कैमरे के सामने क्यों फूट-फूटकर रोए? धर्म परिवर्तन तक की दे डाली चेतावनी