लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर जारी ऊहापोह की स्थिति अब धीरे-धीरे साफ होती दिख रही है. प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 'यूपी तक' के एक कार्यक्रम में जो संकेत दिए हैं, उससे यह माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही संपन्न होंगे. हालांकि, सरकार अभी भी अंतिम फैसले के लिए हाईकोर्ट के निर्देश का इंतजार करने की बात कह रही है.
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पंचायत चुनाव पर राजभर का 'इशारा'
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बातचीत के दौरान स्पष्ट कहा कि पंचायत चुनाव जब भी होंगे, उनकी ही सरकार कराएगी, चाहे वे अभी हों या विधानसभा चुनाव के बाद. उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में चुनावों के टलने के पुख्ता संकेत के रूप में देखा जा रहा है. राजभर ने मामले को अदालत पर डालते हुए कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी मजबूरियां (अधिकारियों की व्यस्तता आदि) कोर्ट के सामने रखी हैं और अब गेंद हाईकोर्ट के पाले में है.
क्यों नहीं चाहती कोई भी पार्टी अभी चुनाव?
दिलचस्प बात यह है कि न केवल सत्ताधारी भाजपा, बल्कि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और अन्य दल भी पंचायत चुनाव को लेकर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं. जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में अब महज 10-11 महीने का वक्त बचा है. ऐसे में कोई भी दल गांव-गांव में होने वाली गुटबाजी और बगावत का जोखिम नहीं उठाना चाहता, जो अक्सर पंचायत चुनावों के दौरान देखने को मिलती है.
2027 का 'सियासी टोन' सेट करेंगे अगले दो दिन
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अगले दो दिन बेहद अहम होने वाले हैं, जहाँ पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं:
बीजेपी का जेवर एयरपोर्ट दांव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल नोएडा में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे. बीजेपी इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास के सबसे बड़े चेहरे के रूप में पेश कर रही है, जो 2027 के चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
अखिलेश यादव की दादरी रैली: बीजेपी के जेवर एयरपोर्ट के काट के तौर पर समाजवादी पार्टी दादरी (गाजियाबाद) में 'भाईचारा समानता रैली' करने जा रही है. इस रैली के जरिए अखिलेश यादव का मुख्य फोकस गुर्जर बिरादरी को साधने पर है, ताकि पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी के जाने के बाद बने शून्य को भरा जा सके.
एक तरफ जहां पंचायत चुनावों के टलने की पूरी संभावना है, वहीं दूसरी तरफ जेवर एयरपोर्ट और दादरी की रैली यह तय करेंगी कि 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा क्या होगी. विकास बनाम सामाजिक समीकरण की यह लड़ाई अब और तेज होने वाली है.
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