उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और दावेदारी को लेकर तनातनी शुरू हो गई है. पूर्वांचल की हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली आजमगढ़ जिले की अतरौलिया विधानसभा सीट को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद आमने-सामने आ गए हैं.
ADVERTISEMENT
अतरौलिया सीट पर क्यों फंसा है पेंच?
अतरौलिया विधानसभा सीट पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) का मजबूत गढ़ मानी जाती है. हालांकि, सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर यहां से अपने बेटे अरुण राजभर को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं और लगातार सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं.
दूसरी ओर, डॉ. संजय निषाद की पार्टी ने भी इस क्षेत्र में अपना जनाधार और प्रभाव काफी बढ़ाया है. निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस सीट पर निषाद और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं का समीकरण उनके ज्यादा अनुकूल है.
संजय निषाद की सलाह: 'सीट छोड़ दें राजभर'
हालिया घटनाक्रम में संजय निषाद ने ओमप्रकाश राजभर को दोटूक सलाह देते हुए कहा है कि उन्हें अतरौलिया सीट पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए. संजय निषाद का तर्क है कि सपा के इस मजबूत किले में यदि अरुण राजभर चुनाव लड़ते हैं, तो उनके चुनाव हारने का बड़ा जोखिम है. गठबंधन के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस सीट पर पुनर्विचार करने की मांग उठ रही है.
एनडीए में सीट शेयरिंग की राह कठिन?
भाजपा (BJP) और उसके सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर जारी चर्चा के बीच इस सीट को लेकर बढ़ा तनाव एनडीए की राह को जटिल बना सकता है.
- सपा का दबदबा: अतरौलिया में समाजवादी पार्टी की पकड़ काफी मजबूत रही है.
- पूर्वांचल का समीकरण: पूर्वांचल की राजनीति में राजभर और निषाद वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. दोनों नेताओं के बीच जारी यह खींचतान पूर्वांचल के चुनावी नतीजों पर गहरा असर डाल सकती है.
अब देखना यह होगा कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व सहयोगियों के बीच इस खींचतान को कैसे सुलझाता है और अतरौलिया सीट किसके खाते में जाती है.
ये भी पढ़ें: 'बुआ बचाओ, मैं तो मर गई...' लखनऊ में बोनट पर लटकी रही अनामिका, स्पीड बढ़ाता रहा शाहनवाज, जानें उसने क्यों किया ऐसा?
ADVERTISEMENT


