कौन होते हैं शिक्षा मित्र जिनका मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर UP सरकार ने किया 18 हजार जानें क्या होता है उनका काम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने शिक्षा मित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में भारी वृद्धि को मंजूरी दी है. शिक्षा मित्रों का मानदेय अब 18 हजार रुपये होगा जबकि अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मिलेंगे. सरकार ने 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई है जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी.

UP Shiksha Mitra Salary Hike
UP Shiksha Mitra Salary Hike

समर्थ श्रीवास्तव

follow google news

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के लाखों शिक्षा मित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों को बड़ी सौगात दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला शिक्षा मित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर रहा, जिससे इनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है. 

Read more!

शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में हुई बढ़ाेतरी

कैबिनेट के नए फैसले के अनुसार अब शिक्षा मित्रों को हर महीने 10 हजार रुपये के बजाय 18 हजार रुपये मानदेय मिलेगा. इसी तरह अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय भी 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये कर दिया गया है. यह फैसला 1 मई 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगा. इस बढ़ोतरी से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लाखों कर्मियों में खुशी की लहर है.

कौन होते हैं शिक्षा मित्र? क्या है उनकी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए साल 1999-2000 में शिक्षा मित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी. ये मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ाते हैं. इनका काम केवल बच्चों को शिक्षित करना ही नहीं बल्कि स्कूल के प्रशासनिक कार्यों में मदद करना भी है. नियमित शिक्षकों की गैर मौजूदगी में ये पूरी कक्षा का संचालन करते हैं और मिड डे मील जैसी सरकारी योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

जानें अंशकालिक क्या होता है अनुदेशक का काम 

अंशकालिक अनुदेशक मुख्य रूप से उच्च प्राथमिक विद्यालयों यानी कक्षा 6 से 8 के छात्रों को कला, शारीरिक शिक्षा और कंप्यूटर या कृषि जैसे तकनीकी विषय पढ़ाते हैं. इन्हें सर्व शिक्षा अभियान के तहत कौशल आधारित शिक्षा देने के लिए रखा गया है. ये पूर्णकालिक शिक्षक नहीं होते बल्कि सप्ताह में तय घंटों के लिए अपनी सेवाएं देते हैं. इनका मुख्य उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें खेल कूद व तकनीक में माहिर बनाना है.

आधुनिक बस अड्डों और जमीन आवंटन को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में शिक्षा के साथ-साथ परिवहन विभाग को लेकर भी कई बड़े फैसले हुए हैं. सरकार ने पीपीपी मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के निर्माण के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. ये बस अड्डे एयरपोर्ट की तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे. इसके अलावा हाथरस के सिकन्दराराऊ, बुलंदशहर के डिबाई और बलरामपुर के तुलसीपुर में नए बस अड्डों के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है.

यह भी पढ़ें:

    follow google news