UPPSC Topper story: पंचर की दुकान चलाने वाले की बेटी बनी अफसर, UPPCS में हासिल की 210वीं रैंक, संघर्ष की कहानी जीत लेगा दिल

UPPCS result 2026: बुलंदशहर की गायत्री वर्मा ने साबित कर दिया कि मेहनत और हौसले के आगे गरीबी भी हार मान जाती है. टायर पंचर की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी ने UPPCS परीक्षा में 210वीं रैंक हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया. उनकी संघर्ष भरी कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

UPPSC Topper Gayatri Verma success story
UPPSC Topper Gayatri Verma success story

मुकुल शर्मा

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UPPSC Gayatri Verma success story: उत्तर प्रदेश में UPPCS का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. इसके बाद लगातार छात्रों के संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी सामने आई. ऐसी ही एक कहानी बुलंदशहर से सामने आई है. यहां एक मामूली टायर पंचर की दुकान चलाने वाले की बेटी गायत्री वर्मा ने उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन यानी UPPCS का एग्जाम क्लियर किया है. इसमें उन्हाेंने 210वीं रैंक हासिल की है. अब गायत्री वर्मा इस सफलता के बाद पूरे परिवार में जश्न का माहौल है. लगातार उन्हें और उनके परिवार को बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है.

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तीसरे अटेंप्ट में मिली गायत्री को बड़ी सफलता

रिजल्ट आने के बाद अब गायत्री वर्मा ने हमारे सहयोगी यूपी तक से बात की है. इसमें उन्होंने अपने इस सफर और संघर्ष के बारे में बताया है. गायत्री ने बताया कि वे अपने पहले प्रयास में वह प्रिलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं. इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने मुख्य परीक्षा तक का सफर तय किया लेकिन फाइनल सिलेक्शन नहीं हो पाया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम किया. उस मुश्किल समय में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया, जिसके बाद तीसरे अटेंप्ट में उन्होंने परीक्षा पास कर ली. गायत्री ने बताया  कि उन्होंने अपना ग्रेजुएशन अलीगढ़ में अपने ननिहाल रहकर पूरा किया था.

पिता ने चलाते हैं पंचर की दुकान

गायत्री की इस सफलता के पीछे उनके पिता राजकुमार वर्मा का लंबा संघर्ष छिपा है. पिता टायर पंचर लगाने का काम करते हैं जिससे रोजाना केवल 200 से 400 रुपये की ही कमाई हो पाती थी. घर का खर्च और बेटी की पढ़ाई का बोझ उठाने के लिए उन्होंने दुकान में ही चाय बेचना भी शुरू कर दिया. गायत्री ने बताया कि कई बार आर्थिक परेशानियां आती थीं और पिता को उनकी फीस भरने के लिए ब्याज पर पैसे तक लेने पड़े. पिता राजकुमार का कहना है कि वह चाहते हैं कि उनकी बेटी पूरी ईमानदारी से काम करे और भ्रष्टाचार को खत्म करने में योगदान दे.

मां और ननिहाल का रहा पूरा सपोर्ट

अपनी सफलता का श्रेय गायत्री अपनी माता जी और ननिहाल को देती हैं. गायत्री के मुताबिक उनकी मां उनके लिए सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम रहीं, जिन्होंने हर असफलता के बाद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. साथ ही उनके नाना-नानी ने आर्थिक रूप से बहुत मदद की, जिसकी वजह से वह बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख पाईं. गायत्री ने अपनी तैयारी के दौरान खुद को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रखा और ऑनलाइन माध्यमों का सही इस्तेमाल कर यह मुकाम हासिल किया.

बेटी की कामयाबी के बाद भी काम करेंगे पिता

बातचीत के दौरान जब पिता राजकुमार से पूछा गया कि क्या अब वह दुकान बंद करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि वो अपना काम जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि बेटी अब अपनी जिम्मेदारी संभालेगी और सरकारी सेवा करेगी. लेकिन पिता के तौर पर उनकी जो जिम्मेदारी है वह उसे निभाते रहेंगे. गायत्री के दो छोटे भाई-बहन और हैं, पिता चाहते हैं कि वे भी इसी तरह कामयाब हों. उन्होंने कहा कि अब बेटी भी अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने में मदद करेगी. गायत्री की मां ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि गरीबी और तंगी के बावजूद उनकी बेटी ने दिन-रात एक कर यह सफलता पाई है.

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