'5 मंजिला मठ, ऊपर स्विमिंग पूल और शीश महल'...क्या है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे इन आरोपों का सच? विद्या मठ की नीलमणि ने बताया सच

Swami Mukteshwaranand Saraswati Varanasi ashram vivad: वाराणसी के केदार घाट स्थित स्वामी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती विद्या मठ पर कोर्ट के आदेश के बाद नाबालिगों के यौन शोषण मामले में केस दर्ज होने से हड़कंप मच गया है. इस बीच हमारे सहयोगी आज तक के पत्रकार वाराणसी स्थित उनके शंकराचार्य के मठ पर पहुंचे और वहां दिवंगत स्वामी स्वरूपानंद महाराज का करीबी माने जानी वालीं नीलमणि से बात की.

Swami Mukteshwaranand Saraswati Vidya Math Varanasi
Swami Mukteshwaranand Saraswati Vidya Math Varanasi

संतोष शर्मा

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Swami Mukteshwaranand Saraswati Vidya Math Varanasi: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य और आज्ञत पर नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप में कोर्ट के आदेश के बाद केस दर्ज हो गया है. इस बीच अब हमारे सहयोगी आज तक के पत्रकार वाराणसी स्थित उनके शंकराचार्य के मठ पर पहुंचे. ये वही मठ है जिसके बारे में दावा किया गया है कि इसकी पांच मंजिला इमारत के ऊपर स्विमिंग पूल बना है और ये वही शीश महल है जहां बच्चों को ले जाया जाता था. इन आरोपों ने धार्मिक जगत में खलबली मचा दी है जिसके बाद आश्रम प्रबंधन की ओर से सफाई भी सामने आई. लेकिन अब आज तक के पत्रकार ने इस मामले में दिवंगत स्वामी स्वरूपानंद की बेहद करीबी नीलमणि से मामले पर बात कर सच्चाई जानने की कोशिश की.

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1986 से जुड़ी सेवादार ने बताया सच

बातचीत के दौरान नीलमणि ने बताया कि वे मठ की देखरेख करती हैं. नीलमणि को दिवंगत स्वामी स्वरूपानंद महाराज का बेहद करीबी माना जाता है. मठ पर लगाए गए इन आरोपों पर नीलमणि ने खुलकर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने बताया कि उन्होंने 1986 में दीक्षा ली थी और यह मठ 1996 में बनकर तैयार हुआ था. नीलमणि के अनुसार, वे स्वामी जी को 1982 से जानती हैं और उनका आचरण हमेशा अत्यंत पवित्र रहा है. उन्होंने इन आरोपों को न केवल निराधार बताया, बल्कि इसे हिंदू मानवता और सनातन धर्म पर एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया प्रहार करार दिया.

लड़कियों के रहने और पढ़ने का क्या है नियम

प्राथमिकी में युवतियों और बालिकाओं के साथ भी दुर्व्यवहार का जिक्र किया गया है. इस पर सफाई देते हुए नीलमणि ने कहा कि विद्या मठ में लड़कियों के पढ़ने का कोई प्रावधान ही नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुजी ने महिलाओं के लिए अलग आश्रम बनाए हैं, जो मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के हीरापुर और सागल घाट में स्थित हैं. वाराणसी के इस मठ का उन बालिकाओं से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है, क्योंकि वे दूसरे प्रदेश के आश्रमों में रहती और पढ़ती हैं.

स्विमिंग पूल और 5 मंजिला इमारत का दावा

शिकायतकर्ता ने मठ को 'शीश महल' बताते हुए ऊपर स्विमिंग पूल होने की बात कही है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रबंधन ने कहा कि इमारत 4 या 5 मंजिला हो सकती है, लेकिन ऊंचे मकान बनाना कोई अपराध नहीं है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी आकर देख सकता है कि यहाँ वैसा कोई वातावरण या लग्जरी सुविधाएं नहीं हैं जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है. उनके अनुसार, यह केवल छवि खराब करने के लिए गढ़ा गया एक झूठ है.

गायब रिकॉर्ड और बच्चों की पहचान पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल उन दो शिष्यों को लेकर है जिनके साथ कुकर्म का दावा किया गया है. नीलमणि का कहना है कि उन्होंने उन बच्चों का नाम पहली बार सुना है. मठ के नियम के अनुसार, यहां आने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड और हस्ताक्षर रजिस्टर में दर्ज होते हैं. वर्तमान में यहां लगभग 300 बच्चों का रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन उन दो बच्चों का कोई जिक्र कहीं नहीं मिलता. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ये पुराने छात्र हैं, तो 'सांदीपनि वेद विद्यालय' से इनके रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है, जहाँ ऑनलाइन डेटा उपलब्ध है.

कानूनी कार्रवाई और भविष्य की रणनीति

पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बाद भी आश्रम प्रबंधन विचलित नहीं है. नीलमणि का मानना है कि जैसे महाभारत में पांडवों की जीत हुई थी, वैसे ही यहां भी सत्य की जीत होगी. उन्होंने बताया कि देशभर से भक्त और यहां तक कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी फोन कर स्वामी जी का समर्थन कर रहे हैं. प्रबंधन का कहना है कि यह पूरा मामला 'प्रपंच' है और वे पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.

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