उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. अब यह विवाद प्रशासनिक हलकों तक पहुंच गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अयोध्या में तैनात GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई टिप्पणी से वे गहराई से आहत हैं. उन्होंने कहा जिस प्रदेश का नमक और रोटी खाता हूं जिस सरकार के वेतन से मेरा परिवार चलता है उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री का सार्वजनिक रूप से अपमान किया जाए, यह मुझे स्वीकार नहीं. मैं रोबोट नहीं हूं, मेरे भीतर भी संवेदनाएं हैं.
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पत्नी से फोन पर बात का वीडियो हुआ वायरल
इस बीच अब इस्तीफा देने के बाद प्रशांत कुमार सिंह पत्नी से फोन पर बात की. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें प्रशांत भावुक नजर आ रहे हैं. वीडियो में वे रोते हुए कह रहे है कि ''मुझसे ये सब सहन नहीं हुआ. मैं दो रातों से सो नहीं पाया था. मेरी दो छोटी बेटियां हैं. लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकता.'' उन्होंने कहा कि इस्तीफा मंजूर होने तक वे अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे और उसके बाद समाज सेवा के कार्यों में जुटेंगे.
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने पद से दिया था इस्तीफा
आपकों बता दें कि इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को बताया था. हालांकि, शासन ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
कौन हैं प्रशांत कुमार सिंह?
प्रशांत कुमार सिंह (48 वर्षीय) मूल रूप से मऊ जिले के सरवा गांव के रहने वाले हैं. उनकी पहली तैनाती सहारनपुर में हुई थी. वहीं, 21 अक्टूबर 2023 को उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई. प्रशांत ने राज्यपाल को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा है कि संविधान में विरोध के तरीके तय हैं, लेकिन पालकी पर बैठकर मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना समाज को तोड़ने का काम है. ऐसे बयान जातिगत वैमनस्य फैलाते हैं. इसका वे खुलकर विरोध करते हैं.
क्या है शंकराचार्य विवाद?
दरअसल, 18 जनवरी को माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने और शिष्यों से कथित धक्का मुक्की के बाद मामला गरमा गया. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कालनेमि शब्द के प्रयोग और फिर शंकराचार्य की ओर से की गई तीखी प्रतिक्रियाओं ने विवाद को और भड़का दिया. इस पूरे घटनाक्रम में संत समाज भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है. अब दो दिनों में दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है.
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