उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय की चर्चा काफी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर और राजनीतिक गलियारों में पवन पांडेय को लेकर सुगबुगाहट तेज है कि पार्टी उन्हें अयोध्या और राज्य की सियासत में किस तरह एक बड़े चेहरे के रूप में पेश कर रही है.
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अखिलेश यादव के भरोसेमंद नेता
तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं. अयोध्या की राजनीति में उनका रसूख और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा जगजाहिर है. यही वजह है कि जब भी अयोध्या या राज्य स्तर पर बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने राजनीतिक घेराबंदी की बात आती है, तो पवन पांडेय का नाम प्रमुखता से सामने आता है.
सपा से निष्कासन और वापसी का दौर
पवन पांडेय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों या अन्य कारणों के चलते समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. हालांकि, बाद में उनकी पार्टी में वापसी हुई और उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ के दम पर एक बार फिर पार्टी के भीतर अपनी साख को साबित किया.
यूपी की सियासत में क्यों हो रही है चर्चा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या का विशेष महत्व है. ऐसे में समाजवादी पार्टी द्वारा पवन पांडेय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में खड़ा करने और उनकी रणनीतिक भूमिका को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. आने वाले समय में उनकी यह भूमिका सपा के लिए कितनी असरदार साबित होगी इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
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