कौन हैं 18 साल की प्रतीक्षा यादव, जिन्होंने लखनऊ में आल्हा गाकर अखिलेश यादव के मंच पर बटोरीं खूब तालियां?

नाह‍िद अंसारी

• 01:17 PM • 01 Sep 2026

Mahoba Aalha Singer Prateeksha Yadav News: लखनऊ में अखिलेश यादव के मंच पर महोबा की 18 साल की आल्हा गायिका प्रतीक्षा यादव ने अपनी आवाज से समां बांध दिया. 'धरती पुत्र मुलायम सिंह सा एक बार फिर नेता दो' गाकर प्रतीक्षा ने अखिलेश यादव का दिल जीत लिया. जानिए बुंदेलखंड की इस प्रतिभावान लोक गायिका की पूरी कहानी.

अखिलेश यादव के मंच पर छाई महोबा की 18 साल की प्रतीक्षा यादव
अखिलेश यादव के मंच पर छाई महोबा की 18 साल की प्रतीक्षा यादव
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Prateeksha Yadav Mahoba: लखनऊ में समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान मंच से उठी एक आवाज ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. दरअसल, सपा चीफ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में जब महोबा की रहने वाली 18 वर्षीय लोक गायिका प्रतीक्षा यादव ने अपनी बुलंद आवाज में आल्हा गायन शुरू किया तो वहां मौजूद लोग सियासत की बातें भूलकर लोक कला के रंग में डूब गए. प्रतीक्षा के गायन से प्रभावित होकर अखिलेश यादव ने न सिर्फ कई बार तालियां बजाईं, बल्कि उन्हें दोबारा मंच पर बुलाकर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव पर लिखा आल्हा दोबारा सुना.

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महोबा से लखनऊ तक का संघर्ष भरा सफर

प्रतीक्षा यादव उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित महोबा जिले के बगवाहा गांव की रहने वाली हैं. वे अपनी छोटी बहन दीक्षा यादव के साथ बचपन से ही आल्हा और लोक गायन करती आ रही हैं. प्रतीक्षा ने बताया कि बुंदेलखंड की सदियों पुरानी वीरगाथा 'आल्हा' को गाना और सीखना कोई आसान काम नहीं था. शुरुआत में बहुत कठिनाइयां आईं, क्योंकि आल्हा गायन को मुख्य रूप से पुरुषों की विधा माना जाता रहा है. हालांकि, अपने पिता के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के बदौलत उन्होंने इस कला को सीखा और आज बड़े मंचों तक पहुंचाया है.

सिर पर हाथ रखकर दिया अखिलेश ने आशीर्वाद

30 अगस्त को आयोजित महाराजा खेत सिंह खंगार की जयंती कार्यक्रम के दौरान प्रतीक्षा यादव को अखिलेश यादव के सामने प्रस्तुति देने का अवसर मिला. उन्होंने महाराजा खेत सिंह खंगार का इतिहास सुनाने के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव के जीवन और योगदान पर आल्हा शैली में पंक्तियां सुनाईं "प्रजातंत्र की है पुकार भगवान ध्यान कर चेता दो, और धरती पुत्र मुलायम सिंह सा एक बार फिर नेता दो."

प्रतीक्षा ने बताया कि जब उन्होंने यह पंक्तियां गाईं, तो अखिलेश यादव बहुत प्रभावित हुए. उन्होंने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और जब प्रतीक्षा मंच से जाने लगीं, तो उन्हें रोककर दोबारा पंक्तियां सुनाने का आग्रह किया.

लोक कला और संस्कृति को बचाए रखने का संकल्प

प्रतीक्षा यादव का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहर, शौर्यगाथाओं और आल्हा गायन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. वे चाहती हैं कि यह विधा केवल गांवों की चौपालों तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों में भी इसे पढ़ाया और सिखाया जाए ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत कभी खत्म न हो.

कौन हैं प्रतीक्षा यादव?

प्रतीक्षा यादव बुंदेलखंड की लोक कला को अपनी आवाज के जरिए नई पहचान दिलाने वाली युवा गायिका हैं. 18 साल की उम्र में उन्होंने पारंपरिक आल्हा गायन में अपनी अलग पहचान बनाई है. खास बात यह है कि जिस विधा को लंबे समय तक पुरुषों से जोड़कर देखा जाता रहा, उसमें प्रतीक्षा ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है.

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