कौन हैं प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली? जानिए BJP की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में क्यों मिली बड़ी जिम्मेदारी

न्यूज तक डेस्क

• 09:36 AM • 18 Aug 2026

Who is Tariq Mansoor: भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख पसमांदा मुस्लिम चेहरों-प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली को बड़ी जिम्मेदारी दी है. एएमयू के पूर्व वीसी तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है. जानिए इनके बारे में...

प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली
प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली
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Prof Tariq Mansoor BJP Vice President: भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है. पार्टी की इस नई टीम में उत्तर प्रदेश से 8 नेताओं को जगह मिली है, लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा दो प्रमुख मुस्लिम चेहरों-प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली की हो रही है. दोनों नेता पसमांदा मुस्लिम समुदाय से आते हैं. बता दें कि यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाला है. ऐसे में चुनाव पहले पार्टी के नेशनल टीम में हुई इस एंट्री को यूपी बीजेपी के 'पसमांदा कार्ड' से जोड़कर देखा जा रहा हे.

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कौन हैं प्रोफेसर तारिक मंसूर?

प्रोफेसर तारिक मंसूर एक जाने-माने शिक्षाविद, सर्जन और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति (Vice Chancellor) हैं.

शिक्षा और करियर: तारिक मंसूर ने जेएन मेडिकल कॉलेज (AMU) से एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी) की डिग्री हासिल की. वह लगभग चार दशकों तक मेडिकल शिक्षा, क्लिनिकल रिसर्च और प्रशासन से जुड़े रहे. उन्होंने 107 से अधिक शोध पत्र (पब्लिकेशन) लिखे और 58 पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों की थीसिस का सुपरविजन किया.

AMU के वीसी और विवाद: 17 मई 2017 को उन्हें एएमयू का वाइस चांसलर नियुक्त किया गया. साल 2019 में सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) विरोध प्रदर्शन के दौरान एएमयू कैंपस में पुलिस बुलाने के फैसले को लेकर उनका भारी विरोध हुआ था. इस दौरान लगातार प्रदर्शनों के बीच उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया था

बीजेपी में एंट्री और पद: पीएम नरेंद्र मोदी को एएमयू के कार्यक्रम में आमंत्रित करने से लेकर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर अपनी बात रखने तक, वे लगातार सुर्खियों में रहे. एएमयू वीसी के तौर पर कार्यकाल पूरा होने के बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाया और बाद में पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया. नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी उनका यह पद बरकरार रखा गया है.

कौन हैं बासित अली?

मेरठ के रहने वाले बासित अली को बीजेपी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बनाया है.

पसमांदा राजनीति का चेहरा: बासित अली खुद को मुस्लिम राजपूत बताते हैं और पसमांदा (दलित व पिछड़ा वर्ग) मुसलमानों के हक की आवाज उठाते रहे हैं. उन्होंने '85-15' का नारा देते हुए कहा था कि 85% पसमांदा मुसलमानों का शोषण हो रहा है, जबकि बाकी 15% राजनीति का फायदा उठा रहे हैं.

कुंदरकी उपचुनाव में अहम भूमिका: संभल जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत में बासित अली की रणनीति को काफी अहम माना गया. उन्होंने पसमांदा मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट कर बीजेपी के पक्ष में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

संगठनात्मक सफर: उन्होंने बीजेपी में जिला मीडिया प्रभारी से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वे यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष रहे और अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की कमान सौंपी गई है.

2027 यूपी चुनाव पर नजर

बीजेपी अक्सर विपक्ष के उन आरोपों का सामना करती रही है कि वह मुस्लिम समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देती. ऐसे में प्रोफेसर तारिक मंसूर और बासित अली जैसे पसमांदा चेहरों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शीर्ष पदों पर बैठाकर पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. अब देखना होगा कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी का यह दांव कितना कारगर साबित होता है.

इनपुट: संतोष शर्मा और उस्मान चौधरी

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