Rekha Verma BJP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी जहां अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए मजबूत बढ़त बनाने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी भी अपने सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने में जुट गई है. इसी कड़ी में बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आने वाली वरिष्ठ नेता रेखा वर्मा को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी दी है.
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जितन प्रसाद को हराकर संसद पहुंची थीं रेखा वर्मा
रेखा वर्मा का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है. उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा सीट से पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा था. अपनी पहली ही चुनावी जंग में उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितन प्रसाद को करारी शिकस्त दी और संसद पहुंचीं. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने दोबारा धौरहरा सीट से जीत दर्ज की. हालांकि 2024 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पार्टी ने संगठन में उनके महत्व को देखते हुए उन पर भरोसा बनाए रखा.
महिला और ओबीसी कार्ड: बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
रेखा वर्मा का चयन केवल एक सांगठनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि इसके पीछे बीजेपी का गहरा रणनीतिक गणित छिपा हुआ है. रेखा वर्मा ओबीसी वर्ग से आती हैं और एक सशक्त महिला चेहरा हैं. बीजेपी की रणनीति 2027 के चुनाव में महिला वोट बैंक के साथ-साथ ओबीसी और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखने की है. अखिलेश यादव के पीडीए के काट के रूप में रेखा वर्मा जैसे नेताओं को आगे करके पार्टी सोशल इंजीनियरिंग का एक बड़ा संदेश दे रही है.
संगठन में लंबा अनुभव, लखीमपुर से दिल्ली तक मजबूत पकड़
मूल रूप से लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी क्षेत्र के मकसूदपुर गांव से ताल्लुक रखने वाली रेखा वर्मा की पकड़ जमीनी राजनीति पर बेहद मजबूत मानी जाती है. इससे पहले 2020 में भी जेपी नड्डा की टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था. अब एक बार फिर 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में जगह देकर शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि 2027 के यूपी चुनाव में संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधने में रेखा वर्मा की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है.
इनपुट: कुमार अभिषेक
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