Varanasi up college student murder: वाराणसी का प्रतिष्ठित यूपी कॉलेज गुरुवार सुबह करीब 11 बजे गोलियों की आवाज से गूंज उठा. सामाजिक विज्ञान संकाय के कॉरिडोर में रोज की तरह छात्र आ-जा रहे थे तभी अचानक एक हमलावर ने बीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह उर्फ सूर्या को निशाना बनाया. हमला इतना सटीक और घातक था कि सूर्या को संभलने तक का मौका नहीं मिला. हमलावर ने चार राउंड फायरिंग की जिसमें गोलियां सीधे सूर्या के सिर और सीने में जा धंसींय
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कौन थे सूर्य प्रताप सिंह?
सूर्य प्रताप सिंह मूल रूप से गाजीपुर जिले की सैदपुर तहसील के दुबईठा गांव के रहने वाले सूर्य प्रताप सिंह एक बेहद मिलनसार और लोकप्रिय छात्र थे. उनके पिता ऋषिदेव सिंह और माता किरन सिंह वाराणसी के ही अतुलानंद विद्यालय में कर्मचारी हैं. दो बहनों के बीच सूर्या इकलौते भाई थे और परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे. जानने वाले बताते हैं कि सूर्या का स्वभाव बहुत मिलनसार था और कॉलेज में उनकी अच्छी खासी पैठ थी.
वारदात और फिल्मी अंदाज में फरार हुआ कातिल
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावर भी छात्र ही बताया जा रहा है. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पहली मंजिल की तरफ भागा और कॉलेज की पिछली दीवार फांदकर रफूचक्कर हो गया. भागते समय उसने अपनी पिस्टल पास के ही एक कूड़े के ढेर में फेंक दी, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया. लहूलुहान सूर्या को तुरंत मलदहिया के निजी अस्पताल और फिर बीएचयू ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
छात्रों का फूटा गुस्सा
अपने साथी की मौत की खबर मिलते ही यूपी कॉलेज के छात्र उग्र हो गए. छात्रों ने कॉलेज का मुख्य गेट बंद कर जमकर तोड़फोड़ की और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि वाराणसी पुलिस कमिश्नर को भारी फोर्स के साथ खुद मोर्चा संभालना पड़ा. फिलहाल पूरा कैंपस छावनी में तब्दील है.
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस हत्याकांड ने कॉलेज प्रशासन की सुरक्षा पोल खोल दी है. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक छात्र हथियार लेकर कैंपस के अंदर और फिर संकाय के गलियारे तक कैसे पहुंच गया? पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और शुरुआती जांच में इसे पुरानी रंजिश या वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम माना जा रहा है.
एक होनहार छात्र का इस तरह अंत होना न केवल उसके परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह बनारस की छात्र राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक गहरा दाग है.
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