उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारियों से रोकते हुए उन्हें सार्वजनिक तौर पर एक बार फिर 'इमैच्योर' (अपरिपक्व) करार दिया है.
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आकाश आनंद पर फैसला और कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला
बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि पार्टी के संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के सिद्धांतों के मुताबिक परिवार के लोगों को कार्य में सहयोग की इजाजत तो है, लेकिन बड़ी जिम्मेदारी देने से पहले पूर्ण परिपक्वता जरूरी है. मायावती के अनुसार, विरोधियों के साम-दाम-दंड-भेद से पार्टी को चुनावी नुकसान से बचाने के लिए आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक समझदार होने की आवश्यकता है.
क्या है फैसले के पीछे की 'अंदरूनी कहानी'?
वरिष्ठ पत्रकारों और बसपा के राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो मायावती के इस फैसले के पीछे कई अहम कारण हैं:
लाइमलाइट और मीडिया बज: हालिया कार्यक्रमों में आकाश आनंद की बढ़ती लोकप्रियता और मीडिया कवरेज को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट थी. मायावती पार्टी के भीतर अपने अलावा किसी दूसरे केंद्र या नाम की अति-चर्चा को पसंद नहीं करतीं.
सोशल मीडिया और बयानों पर विवाद: हाल ही में संघ प्रमुख से जुड़े एक ट्वीट विवाद के बाद आकाश आनंद को अपनी पोस्ट डिलीट करनी पड़ी थी, जिसने पार्टी लाइन से अलग जाने के संकेत दिए थे
2027 चुनाव से पहले सीट शेयरिंग पर गर्माहट
वीडियो में बसपा के अंदरूनी घटनाक्रम के अलावा उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधनों की सीट शेयरिंग पर भी चर्चा की गई है:
NDA का गणित: भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य की 403 सीटों में से करीब 300 सीटों पर खुद चुनाव लड़ सकती है और 70 से 80 सीटें सहयोगियों (RLD, अपना दल, निषाद पार्टी, सुभासपा) के लिए छोड़ सकती है.
INDIA गठबंधन का स्टैंड: कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर बयानबाजी जारी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि "जीत का फॉर्मूला ही सीट का फॉर्मूला है" [10:45], वहीं कांग्रेस का कहना है कि पार्टी को कोई हलके में न ले.
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