योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बार फिर आंदोलन करने की चेतावनी दी है. स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद मीडिया से बातचीत में रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था से लेकर पेपर लीक और सरकारी नौकरियों में भर्ती तक कई मुद्दे उठाए. उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होती है. रामदेव ने कहा कि अगर देश में चल रहे 'घपले' नहीं सुधरे तो उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है.
ADVERTISEMENT
झारखंड में चल रहे आंदोलन को लेकर पूछे गए सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं. स्कूल-कॉलेज के छात्र भी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर परेशान हैं.
'कहीं टीचर नहीं तो कहीं किताबें नहीं'
बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. कहीं बिजली-पानी की सुविधा नहीं है तो कहीं शौचालय तक नहीं हैं. कई जगह स्थिति यह है कि शिक्षक हैं तो किताबें नहीं हैं और किताबें हैं तो शिक्षक नहीं हैं.
उन्होंने परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया. रामदेव ने कहा कि छात्र 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद भी एक लंबी चयन प्रक्रिया से गुजरते हैं. उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है.
सरकारी नौकरी के इंटरव्यू पर बड़ा दावा
रामदेव ने सबसे गंभीर सवाल सरकारी नौकरियों की भर्ती को लेकर उठाए. उन्होंने दावा किया कि खासकर इंटरव्यू के स्तर पर 90 से 99 प्रतिशत तक 'घोटाला' होता है.
उनका आरोप है कि भर्ती के दौरान कई जगह योग्यता के बजाय अपने विचार, संगठन, जाति, वर्ग या समुदाय से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाती है. उन्होंने कहा कि अपने लोगों को अंदर कर लिया जाता है और बाकी उम्मीदवारों को बाहर कर दिया जाता है.
रामदेव ने इसे लोकतंत्र और न्याय के खिलाफ बताया. हालांकि, सरकारी नौकरियों में 90 से 99 प्रतिशत घोटाले के अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आंकड़ा या दस्तावेज पेश नहीं किया.
'25 लाख से एक करोड़ तक लेकर भर्ती'
रामदेव ने भर्ती में रिश्वतखोरी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि कुछ जगह उम्मीदवार का चयन पहले से तय कर लिया जाता है और नौकरी देने के बदले 25 से 50 लाख रुपये, यहां तक कि एक करोड़ रुपये तक लिए जाते हैं.
उन्होंने सवाल किया कि अगर लोगों को अपनी मांगों और अधिकारों के लिए इसी तरह बार-बार आंदोलन करना पड़े तो देश कैसे चलेगा?
रामदेव ने कहा, "भाई, सुधर जाओ, नहीं तो देश में आंदोलन और ज्यादा भी हो सकते हैं."
'घपले ठीक करो, नहीं तो मुझे फिर आंदोलन करना पड़ेगा'
बाबा रामदेव ने यह भी साफ किया कि वह आंदोलन की आड़ में अराजकता का समर्थन नहीं करते. उनका कहना था कि विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए, लेकिन व्यवस्था में मौजूद गड़बड़ियों को भी दूर करना जरूरी है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ये गड़बड़ियां दूर नहीं की गईं तो कहीं ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन के लिए मैदान में उतरना पड़े.
आधी रात को ही क्यों हुआ भारत की आजादी का ऐलान? 15 अगस्त से जुड़ा ये राज शायद नहीं जानते होंगे
ADVERTISEMENT


