Babita Pandey Missing: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में दयारा बुग्याल के गोई बेस कैंप से 29 मई की रात रहस्यमय तरीके से लापता हुई बबीता पांडे का 8 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है. लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद पुलिस और बचाव दल के हाथ अब तक खाली हैं. शुरुआती दिनों में प्रशासन ने सेना और ITBP की मदद से अभियान चलाया था, लेकिन अब इन टीमों को वापस बुला लिया गया है. इसके बाद जिला प्रशासन ने खोज अभियान को नई रणनीति के तहत आगे बढ़ाते हुए नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की विशेष रेस्क्यू टीम को जिम्मेदारी सौंपी है.
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NIM की टीम क्यों है खास?
NIM की टीम को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए स्पेशल ट्रेनिंग मिली होती है. इस टीम के मेंबर के पास बर्फीले पहाड़ों, दुर्गम रास्तों, गहरी खाइयों और खबरा मौसम में खोज अभियान चलाने का लंबा अनुभव है. यही वजह है कि अब प्रशासन ने इस टीम को अभियान में शामिल किया है. वहीं उधर रविवार को हेलीकॉप्टर की मदद से भी दयारा बुग्याल और आसपास के दुर्गम इलाकों में हवाई तलाश की गई. प्रशासन का कहना है कि बबीता की संभावित लोकेशन को लेकर हर एंगल से जांच की जा रही है और कोई भी संभावना नजरअंदाज नहीं की जा रही.
परिवार ने शेयर की इंस्टाग्राम पोस्ट
बबीता के चचेरे भाई पंकज पांडे ने बताया कि बबीता ने 27 या 28 मई को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर हर्षिल के लामा टॉप की कुछ तस्वीरें साझा की थीं. परिवार का मानना है कि ये तस्वीरें उनकी यात्रा के दौरान की हैं और जांच एजेंसियां भी इस पहलू को खंगाल रही हैं.
पुलिस ने क्या कहा?
उत्तरकाशी पुलिस का कहना है कि फिलहाल उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बबीता पांडे को सकुशल तलाशना है. इसके लिए एक CO के नेतृत्व में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, जबकि दूसरी टीम मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है. पुलिस सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमों के साथ अब NIM की रेस्क्यू टीम भी अभियान में जुटी हुई है. इसके अलावा हेलीकॉप्टर से भी इलाके की हवाई निगरानी कर खोज अभियान चलाया गया है. अधिकारियों का कहना है कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द कोई सुराग मिल सके और बबीता को सकुशल बरामद किया जा सके.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे 29 मई की रात अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी के गोई बेस कैंप में टेंट में रुकी थीं. पुलिस के मुताबिक, रात में वो मोबाइल पर गाने सुनते हुए टेंट से बाहर निकलीं, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटीं. काफी तलाश के बावजूद जब उनका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस ने बबीता के साथ मौजूद दोनों साथियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. पिछले कई दिनों से SDRF, NDRF, सेना, ITBP, डॉग स्क्वॉड, ड्रोन और सैकड़ों जवान जंगलों, खाइयों और आसपास की झीलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. परिवार और स्थानीय लोग प्रशासन से खोज अभियान और तेज करने की मांग कर रहे हैं.
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