बदरीनाथ धाम में मौन व्रत पर बैठे कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला, बोले- आस्था से खिलवाड़ करने वालों को माफ नहीं करेंगे नारायण

कमल नयन सिलोड़ी

• 07:54 PM • 07 Jul 2026

Badrinath Dham Chadhawa Vivad: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है. सीसीटीवी कैमरे बदलने के अगले दिन सामने आए इस मामले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच जारी है, लेकिन श्रद्धालुओं और विपक्ष की मांग है कि पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए.

Badrinath Dham Chadhawa Vivad
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Badrinath Dham Donation Controversy: भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम में चढ़ावे को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. बीती 2 जुलाई को सामने आए इस मामले की जांच अभी चल रही है. लेकिन जांच जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे इस पूरे घटनाक्रम पर कई नए और गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं. इस मामले को लेकर अब जमकर सियासत भी शुरू हो चुकी है. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल खड़ा किया है कि मंदिर समिति की तरफ से पूर्व में जिन मामलों की जांच करवाई गई थी, उनकी रिपोर्ट को आखिर आज तक जनता के सामने क्यों नहीं लाया गया? ऐसे में लोगों के बीच यह आशंका भी गहरी होने लगी है कि कहीं इस बार की जांच रिपोर्ट भी फाइलों के भीतर ही सिमट कर न रह जाए. यही वजह है कि श्रद्धालु और स्थानीय जनता पूरे मामले में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग कर रही है.

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सीसीटीवी कैमरे बदलने के अगले ही दिन सामने आया मामला

जानकारी के मुताबिक बीती 1 जुलाई को बदरीनाथ मंदिर परिसर के भीतर सीसीटीवी कैमरे बदले जाने का काम किया गया था. खास बात यह है कि इसी दिन दान पेटी यानी चढ़ावे से जुड़ी तय प्रक्रिया को भी पूरा किया गया था. ठीक इसके अगले दिन यानी 2 जुलाई को चढ़ावा चोरी की घटना का मामला सोशल मीडिया के जरिए सबके सामने आ गया, जिसके बाद से ही इस पूरे घटनाक्रम ने बड़ा रूप ले लिया है. अब इस पूरे प्रकरण से जुड़ी कई तरह की नई बातें सामने आने का दावा भी किया जा रहा है, हालांकि अभी तक उनकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. फिलहाल किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि न होने के बावजूद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है. इसे इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है. वहीं लोगों के बीच यह सवाल भी लगातार घूम रहा है कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई थी तो आखिर जांच कराने की जरूरत ही क्यों पड़ी?

अधिकारियों तक पहुंचा सीसीटीवी वीडियो और सीईओ का बयान

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस पूरी घटना से जुड़ा हुआ एक सीसीटीवी वीडियो कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ मंदिर समिति के कुछ पदाधिकारियों तक भी पहुंच चुका है. हालांकि इस वीडियो को अभी तक पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया गया है और जांच समिति के दायरे में इस वीडियो की पड़ताल भी शामिल है. इस पूरे मामले को लेकर बीकेटीसी के CEO ने भी साफ किया है कि वे वीडियो की जांच से बिल्कुल भी इनकार नहीं कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने पहले दिन यह बात जरूर कही थी कि वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं है. अब इस समय पूरे प्रदेश सहित देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं की नजर इस जांच समिति की रिपोर्ट पर ही टिकी हुई है कि आखिर इस विवाद के पीछे का क्या सच बाहर आता है.

कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला का बदरीनाथ धाम में मौन व्रत

चमोली के बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान में हुई इस कथित गड़बड़ी का मामला अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है. इस मामले में संलिप्त दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द बेहद सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला खुद बदरीनाथ धाम में ही मौन व्रत पर बैठ गए हैं. अपने तमाम कार्यकर्ताओं के साथ मंदिर परिसर के भीतर पहुंचे विधायक बुटोला ने वहां पूरे 1 घंटे तक का मौन धारण करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. कांग्रेस विधायक का इस मामले पर बिल्कुल साफ तौर पर कहना है कि धाम की पवित्रता और यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और उन पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

निष्पक्ष जांच और विपक्ष की भागीदारी की उठी मांग

बदरीनाथ विधानसभा सीट से विधायक लखपत सिंह बुटोला ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के जो आरोप लगे हैं, उसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह पूरा विषय करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से सीधा जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए. विधायक बुटोला ने यह आरोप भी लगाया कि जांच को केवल एक औपचारिकता बनाकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि सभी तथ्यों के आधार पर इसे सही तरीके से पूरा किया जाए ताकि लोगों का विश्वास न टूटे. उन्होंने अपनी मांग में यह भी कहा कि इस पूरी जांच प्रक्रिया में या तो विपक्ष की भागीदारी तय की जाए या फिर इसे पूरी तरह से न्यायिक निगरानी में कराया जाए, जिससे किसी भी तरह के पक्षपात की कोई गुंजाइश न रहे. उनका कहना है कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए.

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