Badrinath donation controversy: बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर उत्तराखंड में सियासत गरमा गई है. इस पूरे विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी कांग्रेस सके प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को सार्वजनिक बहस की चुनौती देकर खुद तय जगह पर नहीं पहुंचे. इस घटना के बाद गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और मंदिर समिति को कटघरे में खड़ा कर दिया है. गोदियाल ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हेमंत द्विवेदी के इस्तीफे की भी मांग की है.
ADVERTISEMENT
बहस की चुनौती से भागे BKTC अध्यक्ष, प्रेस क्लब पहुंचे गोदियाल
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को खुले मंच पर बहस करने की चुनौती दी थी. गोदियाल ने इस चुनौती को स्वीकार किया और तय समय के अनुसार प्रेस क्लब पहुंच गए. लेकिन हेमंत द्विवेदी खुद वहां नहीं आए. इसके बाद कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना. ऐसे में अब इसे लेकर कांग्रेस बीजेपी पर हमलावार है और दोनों दलों के नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है.
नेता प्रतिपक्ष की अध्यक्षता में जांच कराने की उठी मांग
इस बहस में हेमंत द्विवेदी के न पहुंचने के बाद गणेश गोदियाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने मांग की कि बदरीनाथ धाम में हुए चढ़ावा चोरी मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की जाए. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाकर इस मामले की जांच करवाई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
इस्तीफे की मांग पर अड़े गोदियाल, द्विवेदी ने भी दागे पुराने सवाल
इस मामले को लेकर गणेश गोदियाल हेमंत द्विवेदी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ हेमंत द्विवेदी ने भी गोदियाल के पुराने कार्यकाल को लेकर मोर्चा खोल रखा है. द्विवेदी ने सवाल उठाया है कि साल 2012 से 2017 के बीच जब गणेश गोदियाल BKTC के अध्यक्ष थे, तब उनके कार्यकाल में क्या-क्या हुआ. ऐसे अब दोनों ही नेता एक-दूसरे के दौर के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं.
आरोपी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति को लेकर खड़े हुए बड़े सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गणेश गोदियाल ने चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि प्रमोद की नियुक्ति का प्रस्ताव साल 2010 में समिति के बोर्ड के सामने रखा गया था. गोदियाल ने बीजेपी सरकार को घेरते हुए पूछा कि अगर उस समय इस नियुक्ति में कोई भी गड़बड़ी थी तो बीजेपी ने तब इसे क्यों नहीं रोका. उन्होंने साफ किया कि उनके कार्यकाल में जितने भी निर्माण कार्य हुए, वे सब बोर्ड की मंजूरी के बाद ही किए गए थे, इसलिए उन पर लग रहे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.
नौ साल की बीजेपी सरकार से गोदियाल का सीधा सवाल
गणेश गोदियाल ने प्रदेश की सरकार पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले नौ सालों से बीजेपी की सरकार है. अगर उनके कार्यकाल में किसी भी तरह की कोई अनियमितता या गड़बड़ी हुई थी,तो सरकार ने अब तक उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की. गोदियाल ने कहा कि सरकार और मंदिर समिति के अध्यक्ष को केवल मनगढ़ंत आरोप लगाने के बजाय इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि सच सबके सामने आ सके.
ADVERTISEMENT


